Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

Samveda Mantra 870

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- त्रित आप्त्यः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
अ꣣भि꣡ ब्रह्मी꣢꣯रनूषत य꣣ह्वी꣢रृ꣣त꣡स्य꣢ मा꣣त꣡रः꣢ । म꣣र्ज꣡य꣢न्ती꣣र्दिवः꣡ शिशु꣢꣯म् ॥८७०॥

अ꣣भि꣢ । ब्र꣡ह्मीः꣢꣯ । अ꣣नूषत । यह्वीः꣢ । ऋ꣣त꣡स्य꣢ । मा꣣त꣡रः꣢ । म꣣र्ज꣡य꣢न्तीः । दि꣣वः꣢ । शि꣡शु꣢꣯म् ॥८७०॥

Mantra without Swara
अभि ब्रह्मीरनूषत यह्वीरृतस्य मातरः । मर्जयन्तीर्दिवः शिशुम् ॥

अभि । ब्रह्मीः । अनूषत । यह्वीः । ऋतस्य । मातरः । मर्जयन्तीः । दिवः । शिशुम् ॥८७०॥

Samveda - Mantra Number : 870
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 2; Ardh Prapathak » 2;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 4; Khand » 5;

Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar) - हिन्दी
Meaning
गत मन्त्र में वर्णित (‘तिस्रो वाचः') = ऋग्यजुसामरूप तीन प्रकार की वेदवाणियाँ (दिवः) = ज्ञान के (शिशुम्) = तीव्र करनेवाले [शो तनूकरणे], ज्ञान-दीप्ति प्राप्त करानेवाले अथवा ज्ञान से हृदय में प्रकाशित होने के कारण ज्ञान के पुञ्जरूप उस प्रभु को (अभ्यनूषत) = स्तुत करती हैं। ('सर्वे वदा यत् पदमामनन्ति') = इस वाक्य के अनुसार सब वेदवाणियों का अन्तिम तात्पर्य उस प्रभु में ही है। ये वाणियाँ – १. (ब्रह्मीः) = ब्रह्म का प्रतिपादन करनेवाली, ब्रह्म को प्राप्त करानेवाली हैं, २. (यह्वीः) = [महत्य:] ये वेदवाणियाँ महान् हैं, अर्थगौरव के कारण अत्यधिक महिमावाली हैं । सम्पूर्ण विद्याओं के बीज इनमें निहित हैं, अतः इनकी महत्ता तो सुव्यक्त ही है । ३. (ऋतस्य मातरः) = ये सत्यज्ञान की माताएँ हैं। सम्पूर्ण

सत्यविद्याओं को जन्म देनेवाली हैं। सब विद्याओं के बीज इसमें निहित हैं, वे ही बीज वृक्षरूप से अंकुरित व विकसित होकर हमें प्रभु-प्राप्तिरूप महान् फल को प्राप्त कराते हैं । इस लोक में भी आयु, प्राण, प्रजा, पशु, कीर्ति, द्रविण व ब्रह्मवर्चस्' इसके फल हैं। ये फल भी सत्य हैं, परन्तु इसका अन्तिम फल प्रभु-प्राप्ति तो सत्य का भी सत्य है, अत: वेदवाणियाँ सत्य की निर्मात्री हैं। ४. (मर्जयन्तीः) = ये हमारे जीवनों को परिमार्जित – शुद्ध करनेवाली हैं। उस प्रभु के प्रकाश में वासनाओं की मलिनता का सम्भव ही कैसे हो सकता है ? "
Essence
वेदवाणियाँ हमें पवित्र जीवनवाला बनाकर प्रभु का दर्शन करनेवाली हैं ।
Subject
सत्य की निर्मात्री वेदवाणियाँ