Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

Samveda Mantra 842

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- कश्यपो मारीचः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
पु꣣नानो꣡ वरि꣢꣯वस्कृ꣣ध्यू꣢र्जं꣣ ज꣡ना꣢य गिर्वणः । ह꣡रे꣢ सृजा꣣न꣢ आ꣣शि꣡र꣢म् ॥८४२॥

पु꣣नानः꣢ । व꣡रि꣢꣯वः । कृ꣣धि । ऊ꣡र्ज꣢꣯म् । ज꣡ना꣢꣯य । गि꣣र्वणः । गिः । वनः । ह꣡रे꣢꣯ । सृ꣣जा꣢नः । आ꣣शि꣡र꣢म् । आ꣣ । शि꣡र꣢꣯म् ॥८४२॥

Mantra without Swara
पुनानो वरिवस्कृध्यूर्जं जनाय गिर्वणः । हरे सृजान आशिरम् ॥

पुनानः । वरिवः । कृधि । ऊर्जम् । जनाय । गिर्वणः । गिः । वनः । हरे । सृजानः । आशिरम् । आ । शिरम् ॥८४२॥

Samveda - Mantra Number : 842
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 2; Ardh Prapathak » 2;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 4; Khand » 1;

Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar) - हिन्दी
Meaning
१. हे प्रभो! (पुनानः) = हमें पवित्र करते हुए आप (वरिवः) = [:-ज्ञान-धन व मोक्षरूप धन (कृधि) = प्राप्त कराइए। जितना-जितना हमारा हृदय पवित्र होता जाएगा उतना उतना ही वहाँ ज्ञान का प्रकाश होगा और हम मोक्ष प्राप्ति के अधिकारी भी होंगे । २. हे (गिर्वणः) = वेदवाणियों के द्वारा उपासनीय प्रभो ! (जनाय) = अपने उपासकजन के लिए आप (ऊर्जं कृधि) = बल व प्राणशक्ति दीजिए । ३. (हरे) = हे सब पापों के हरनेवाले प्रभो! आप हमें (आशिरम्) = शरण (सृजान:) = देनेवाले होओ। आपकी शरण में हम सब पापों से बचे रहेंगे । आशी: आश्रयणाद्वा – नि० ६.८, (आशृ) = पापों को विशीर्ण करनेवालीप्रभु की शरण पापों को शीर्ण करती है ।
Essence
१. पवित्रता के द्वारा हम ज्ञान व मोक्ष धन को प्राप्त करें, २. प्रभु की शरण में रहकर पापों से बचें ।