Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

Samveda Mantra 802

1875 Mantra
Devata- इन्द्राग्नी Rishi- वसिष्ठो मैत्रावरुणिः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
ता꣡ वां꣢ गी꣣र्भि꣡र्वि꣢प꣣न्यु꣢वः꣣ प्र꣡य꣢स्वन्तो हवामहे । मे꣣ध꣡सा꣢ता सनि꣣ष्य꣡वः꣢ ॥८०२॥

ता꣢ । वा꣣म् । गीर्भिः꣢ । वि꣣पन्यु꣡वः꣢ । प्र꣡य꣢꣯स्वन्तः । ह꣣वामहे । मेध꣡सा꣢ता । मे꣣ध꣢ । सा꣣ता । सनिष्य꣡वः꣢ ॥८०२॥

Mantra without Swara
ता वां गीर्भिर्विपन्युवः प्रयस्वन्तो हवामहे । मेधसाता सनिष्यवः ॥

ता । वाम् । गीर्भिः । विपन्युवः । प्रयस्वन्तः । हवामहे । मेधसाता । मेध । साता । सनिष्यवः ॥८०२॥

Samveda - Mantra Number : 802
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 2; Ardh Prapathak » 1;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 3; Khand » 2;

Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar) - हिन्दी
Meaning
(ता वाम्) = हे इन्द्र और अग्नि आप दोनों को हम (हवामहे) = पुकारते हैं । हम ‘शक्ति व प्रकाश' के पुञ्ज आपकी उपासना करते हैं । कैसे हम ? १. (गीर्भिः विपन्युव:) = वेदवाणियों से आपका विशिष्ट स्तवन करनेवाले । ‘विपन्यवः' का अर्थ निरुक्त में 'मेधावी' भी है, वेदवाणियों— ज्ञान के वचनों से अपने को मेधावी बनानेवाले । २. (प्रयस्वन्तः) = उत्तम प्रयत्नोंवाले– उद्योगशील, ३. (मेधसातः) = यज्ञों को प्राप्त करनेवाले, अर्थात् यज्ञशील जीवनवाले, ४. (सनिष्यवः) = निः श्रेयसरूप धन को प्राप्त करने की इच्छावाले, प्रभु को प्राप्त करने की प्रबल कामनावाले । 
Essence
हम मेधावी, श्रमी, यज्ञशील व प्रभु-प्राप्ति की प्रबल कामनावाले होकर प्रभु से शक्ति व प्रकाश प्राप्त करें ।
Subject
शक्ति व प्रकाश