Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

Samveda Mantra 788

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- अहमीयुराङ्गिरसः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
ये꣡ ते꣢ प꣣वि꣡त्र꣢मू꣣र्म꣡यो꣢ऽभि꣣क्ष꣡र꣢न्ति꣣ धा꣡र꣢या । ते꣡भि꣢र्नः सोम मृडय ॥७८८॥

ये꣢ । ते꣣ । पवि꣡त्र꣢म् । ऊ꣣र्म꣡यः꣢ । अ꣣भिक्ष꣡र꣢न्ति । अ꣣भि । क्ष꣡र꣢꣯न्ति । धा꣡र꣢꣯या । ते꣡भिः꣢꣯ । नः꣣ । सोम । मृडय ॥७८८॥

Mantra without Swara
ये ते पवित्रमूर्मयोऽभिक्षरन्ति धारया । तेभिर्नः सोम मृडय ॥

ये । ते । पवित्रम् । ऊर्मयः । अभिक्षरन्ति । अभि । क्षरन्ति । धारया । तेभिः । नः । सोम । मृडय ॥७८८॥

Samveda - Mantra Number : 788
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 2; Ardh Prapathak » 1;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 3; Khand » 1;

Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar) - हिन्दी
Meaning
हे (सोम) = [स+उमा] = ज्ञानसहित प्रभो ! (ये) = जो (ते) = तेरे (ऊर्मय:) = ज्ञान के प्रकाश [Lights]= (धारया) - वेदवाणी के द्वारा अथवा धारण के हेतु से (पवित्रम् अभिक्षरन्ति) = हृदयाकाश को पवित्र करनेवाले की ओर [क्षर To flow] बहते हैं, (तेभिः) = उन प्रकाशों से (नः) = हमें (मृडय) = सुखी कीजिए । सब क्लेशों का मूल 'अविद्या' है । अज्ञान के कारण ही सब क्लेश - कष्ट हैं । क्लेशों से ऊपर उठने के लिए प्रकाश की आवश्यकता है। प्रभु ने इस प्रकाश को वेदवाणी में रक्खा है । वेदवाणी में निहित ये प्रकाश उस व्यक्ति को प्राप्त होते हैं, जो अपने हृदय को पवित्र बनाता है। 
Essence
हम पवित्र बनें, प्रभु के प्रकाश को प्राप्त करें और सुखी जीवनवाले हों ।
 
Subject
प्रभु का प्रकाश