Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

Samveda Mantra 780

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- अहमीयुराङ्गिरसः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
या꣡ ते꣢ भी꣣मा꣡न्यायु꣢꣯धा ति꣣ग्मा꣢नि꣣ स꣢न्ति꣣ धू꣡र्व꣢णे । र꣡क्षा꣢ समस्य नो नि꣣दः꣢ ॥७८०॥

या । ते꣣ । भीमा꣡नि꣢ । आ꣡यु꣢꣯धा । ति꣣ग्मा꣡नि꣢ । स꣡न्ति꣢꣯ । धू꣡र्व꣢꣯णे । र꣡क्ष꣢꣯ । स꣣मस्य । नः । निदः꣢ ॥७८०॥

Mantra without Swara
या ते भीमान्यायुधा तिग्मानि सन्ति धूर्वणे । रक्षा समस्य नो निदः ॥

या । ते । भीमानि । आयुधा । तिग्मानि । सन्ति । धूर्वणे । रक्ष । समस्य । नः । निदः ॥७८०॥

Samveda - Mantra Number : 780
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 2; Ardh Prapathak » 1;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 3; Khand » 1;

Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar) - हिन्दी
Meaning
हे प्रभो ! (या) = जो (ते) = तेरे (भीमानि) = शत्रुओं के लिए भय पैदा करनेवाले (तिग्मानि) = तेज (आयुधा) = शस्त्र (धूर्वणे) = हिंसकों को पराजित करने के लिए (सन्ति) =हैं, उन अस्त्रों के द्वारा (न:) = हमारी (समस्य) = सब (निदः) = निन्दक शत्रुओं से (रक्ष) = रक्षा कीजिए । =

प्रभु का प्रखर अस्त्र 'ज्ञान' ही है । इस ज्ञान की ज्योति में ही काम भस्म हो जाता है । प्रभु का यह ज्ञानरूप अस्त्र इन कामादि के लिए भीम व तिग्म है । ज्ञान व्यसनों के मूल – लोभ को ही समाप्त कर देता है। ‘प्रेम-दान-दया' आदि सात्त्विक वृत्तियाँ ही वे अस्त्र हैं जो ‘काम-क्रोधलोभादि' असुरवृत्तियों की प्रतिपक्ष हैं । हम प्रेम से काम को, दान से लोभ को और दया की वृत्ति से क्रोध का संहार करें। प्रभु अपने ज्ञानरूप प्रखर शस्त्र से सब निन्दनीय शत्रुओं से हमारी रक्षा करें ।
Essence
हम प्रभु की उपासना करें, प्रभु के अस्त्र शत्रुओं का असन करेंगे, दूर फेंकेंगे।
 
Subject
भीम व तिग्म आयुध