Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

Samveda Mantra 777

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- जमदग्निर्भार्गवः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
तु꣢भ्ये꣣मा꣡ भुव꣢꣯ना कवे महि꣣म्ने꣡ सो꣢म तस्थिरे । तु꣡भ्यं꣢ धावन्ति धे꣣न꣡वः꣢ ॥७७७॥

तु꣡भ्य꣢꣯ । इ꣡मा꣢ । भु꣡व꣢꣯ना । क꣣वे । महिम्ने꣢ । सो꣣म । तस्थिरे । तु꣡भ्य꣢꣯म् । धा꣣वन्ति । धेन꣡वः꣢ ॥७७७॥

Mantra without Swara
तुभ्येमा भुवना कवे महिम्ने सोम तस्थिरे । तुभ्यं धावन्ति धेनवः ॥

तुभ्य । इमा । भुवना । कवे । महिम्ने । सोम । तस्थिरे । तुभ्यम् । धावन्ति । धेनवः ॥७७७॥

Samveda - Mantra Number : 777
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 2; Ardh Prapathak » 1;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 3; Khand » 1;

Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar) - हिन्दी
Meaning
हे (कवे) = क्रान्तदर्शिन् ! (सोम) = सर्वज्ञानसम्पन्न प्रभो ! (इमा भुवना) = ये सब लोक-लोकान्तर तुभ्य (महिम्ने) = आपकी ही महिमा के लिए तस्थिरे= स्थित हैं। सब लोक-लोकान्तर प्रभु की ही महिमा को प्रकट कर रहे हैं। (‘यस्येमे हिमवन्तो महित्वा यस्य समुद्रं रसया सहाहुः') = ये हिमाच्छादित पर्वत, समुद्र व पृथिवी उस प्रभु की ही महिमा को कह रहे हैं। ('अभ्यनूषत व्रा:') = गगन को आच्छादित करनेवाले सितारे उस प्रभु का ही स्तवन कर रहे हैं ।

हे प्रभो ! (धेनवः) = ज्ञानदुग्ध का पान करानेवाली वेदवाणियाँ (तुभ्यम्) = आप के लिए ही, अर्थात् हम आपको प्राप्त कर सकें इसलिए ही (धावन्ति) = हमें गतिशील बनाकर शुद्ध कर रही हैं । वेदवाणियों से हमारा जीवन शुद्ध बनता है और हम आपको प्राप्त करने के योग्य बन पाते हैं। 
Essence
ये सारे लोक-लोकान्तर प्रभु की महिमा का ही ख्यापन कर रहे हैं और ये वेदवाणियाँ हमारे जीवनों को शुद्ध करके हमें प्रभु की गोद में बैठने के योग्य बनाती हैं।
 
Subject
इदं सर्वं तस्योपव्याख्यानम्