Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

Samveda Mantra 756

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- अवत्सारः काश्यपः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
अ꣣य꣡ꣳ सूर्य꣢꣯ इवोप꣣दृ꣢ग꣣य꣡ꣳ सरा꣢꣯ꣳसि धावति । स꣣प्त꣢ प्र꣣व꣢त꣣ आ꣡ दिव꣢꣯म् ॥७५६॥

अ꣣य꣢म् । सू꣡र्यः꣢꣯ । इ꣣व । उपदृ꣢क् । उ꣣प । दृ꣢क् । अ꣣य꣢म् । स꣡रा꣢꣯ꣳसि । धा꣣वति । स꣣प्त꣢ । प्र꣣व꣡तः꣢ । आ । दि꣡व꣢꣯म् ॥७५६॥

Mantra without Swara
अयꣳ सूर्य इवोपदृगयꣳ सराꣳसि धावति । सप्त प्रवत आ दिवम् ॥

अयम् । सूर्यः । इव । उपदृक् । उप । दृक् । अयम् । सराꣳसि । धावति । सप्त । प्रवतः । आ । दिवम् ॥७५६॥

Samveda - Mantra Number : 756
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 1; Ardh Prapathak » 2;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 2; Khand » 5;

Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar) - हिन्दी
Meaning
उपर्युक्त मन्त्र की भावना के अनुसार वेदों के दोहन में प्रवृत्त (अयम्) = यह अवत्सार (उपदृक्) = कुछ-कुछ (सूर्य: इव) = सूर्य के समान दिखने लगता है। (‘अहमिद्धि पितुष्परि मेधामृतस्य जग्रह | अहं सूर्य इवाजनि') = वेदवाणी [ऋत की मेधा] का ग्रहण करके सूर्य की भाँति तो व्यक्ति हो ही जाता है— सूर्य के समान उससे भी चारों ओर प्रकाश फैलने लगता है। 

ऐसा क्यों न हो ? (अयम्) = यह तो निरन्तर (सरांसि) = ज्ञानों की ओर (धावति) = दौड़ रहा है। सरस् शब्द ज्ञान के लिए प्रयुक्त होता है । यह बात इसी से स्पष्ट है कि ज्ञान की देवता को 'सरस्वती' कहते हैं। गुरु-शिष्य परम्परा से यह ज्ञान आगे और आगे सरकता है, इसलिए इसका नाम 'सरस्' हो गया है ।

इस अधिकाधिक ज्ञान प्राप्ति का ही परिणाम है कि यह (सप्त प्रवतः) = सात ऊँचाइयों [Elevations] को प्राप्त करता है । यह सात ऊँचाइयाँ ही 'भूः, भुवः, स्व:, महः, जन:, तपः, सत्यम्' इन शब्दों से क्रमश: कही जाती हैं । मनुष्य एक जन्म में नहीं तो, कुछ जन्मों में इन लोकों का आक्रमण कर ही पाता है। ऊँचा उठते-उठते यह आ- दिवम्- उस प्रकाशमय लोक तक पहुँचता है जिससे ऊपर अन्य लोक न होकर ब्रह्म की ही सत्ता है । इस स्थिति में पहुँचनेवाला वहाँ पहुँचता है जहाँ ('यत्रामृतः स पुरुषो ह्यव्ययात्मा') = उस अव्यय अमृत प्रभु की सत्ता है। 
Essence
हम ज्ञान को प्राप्त कर ऊँचे उठते हुए प्रकाशमयलोक में पहुँचे।
Subject
सप्त भूमिकाओं का आरोहण [The Seven Elevations]