Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

Samveda Mantra 726

1875 Mantra
Devata- इन्द्रः Rishi- इरिम्बिठिः काण्वः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
शा꣡चि꣢गो꣣ शा꣡चि꣢पूजना꣣य꣡ꣳ रणा꣢꣯य ते सु꣣तः꣢ । आ꣡ख꣢ण्डल꣣ प्र꣡ हू꣢यसे ॥७२६॥

शा꣡चि꣢꣯गो । शा꣡चि꣢꣯ । गो꣣ । शा꣡चि꣢꣯पूजन । शा꣡चि꣢꣯ । पू꣣जन । अय꣢म् । र꣡णा꣢꣯य । ते꣣ । सुतः꣢ । आ꣡ख꣢꣯ण्डल । प्र । हू꣡यसे ॥७२६॥

Mantra without Swara
शाचिगो शाचिपूजनायꣳ रणाय ते सुतः । आखण्डल प्र हूयसे ॥

शाचिगो । शाचि । गो । शाचिपूजन । शाचि । पूजन । अयम् । रणाय । ते । सुतः । आखण्डल । प्र । हूयसे ॥७२६॥

Samveda - Mantra Number : 726
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 1; Ardh Prapathak » 2;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 2; Khand » 2;

Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar) - हिन्दी
Meaning
प्रभु इरिम्बिठि की उपर्युक्त आराधना का प्रत्युत्तर देते हैं कि (शाचिगो) = शक्ति-सम्पन्न ज्ञानवाले! [शाचि=शक्ति, गो=ज्ञान] (शाचिपूजन) = शक्ति-सम्पन्न भक्तिवाले! (ते रणाय) = तेरे जीवन की रमणीयता के लिए (अयं सुतः) = यह सोम-वीर्य तेरे अन्दर उत्पन्न किया गया है । इसकी सुरक्षा के द्वारा कामभोगादि सब आसुर वृत्तियों का संहार करके तू (आखण्डल) = असुरों का समन्तात् भेदन करनेवाला (प्रहूयसे) = पुकारा जाता है । जीवात्मा आखण्डल व इन्द्र कहलाता है, यदि वह इन सब आसुर वृत्तियों का खण्डन कर पाता है ।

आसुर वृत्तियों के संहार के लिए ही प्रभु ने इस शरीर में सोम के सवन की व्यवस्था की है । भोजन से रस-रुधिरादि के क्रम से सप्तम धातु यह सोम वा वीर्य होता है। ये सातों के सातों रत्न हैं । शरीर को रमणीय बनानेवाले हैं। यह सप्तम धातु तो इन रत्नों में भी रत्न है, इन सबका सार है । इसी ने हमारे जीवन को सुन्दर बनाना है । इसी की रक्षा पर यह निर्भर है कि हम सब शत्रुओं का पराभव करके ‘आखण्डल' बनते हैं या नहीं। इसकी रक्षा कर सके तो 'आखण्डल' बनेंगे ही। इस सोम की रक्षा से हमारा ज्ञान व हमारी भक्ति दोनों ही शक्ति सम्पन्न होंगी, अन्यथा हमारा ज्ञान भी निर्बल होगा व भक्ति भी फल्गु [फोकी] ही होगी । उस समय हमारे स्तोत्र केवल मुख से उच्चरित हो रहे होंगे, उनका स्रोत हृदय न होगा । हम अकर्मण्य होकर प्रभु से रक्षा-याचना करेंगे जो निष्फल होगी ।
Essence
हमारा ज्ञान व पूजन शक्तिशाली हो ।
 
Subject
आखण्डल