Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

Samveda Mantra 7

1875 Mantra
Devata- अग्निः Rishi- भरद्वाजो बार्हस्पत्यः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः Kaand Name- आग्नेयं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- आग्नेयं पर्व
Mantra with Swara
ए꣢ह्यू꣣ षु꣡ ब्रवा꣢꣯णि꣣ ते꣡ऽग्न꣢ इ꣣त्थे꣡त꣢रा꣣ गि꣡रः꣢ । ए꣣भि꣡र्व꣢र्धास꣣ इ꣡न्दु꣢भिः ॥७॥

आ꣢ । इ꣣हि । उ । सु꣢ । ब्र꣡वा꣢꣯णि । ते꣣ । अ꣡ग्ने꣢꣯ । इ꣣त्था꣢ । इ꣡त꣢꣯राः । गि꣡रः꣢꣯ । ए꣣भिः꣢ । व꣣र्धासे । इ꣡न्दु꣢꣯भिः ॥७॥

Mantra without Swara
एह्यू षु ब्रवाणि तेऽग्न इत्थेतरा गिरः । एभिर्वर्धास इन्दुभिः ॥

आ । इहि । उ । सु । ब्रवाणि । ते । अग्ने । इत्था । इतराः । गिरः । एभिः । वर्धासे । इन्दुभिः ॥७॥

Samveda - Mantra Number : 7
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 1; Ardh Prapathak » 1; Dashati » 1;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 1; Khand » 1;

Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar) - हिन्दी
Meaning
हे (अग्ने)= प्रभो! (आ इहि)= आप मेरे हृदय में आइए, क्योंकि (ते)= आपके सामीप्य से मैं (इतराः)=सामान्य व्यवहार की बातों को भी (इत्था ब्रवाणि)= सत्य ही बोलता हूँ। प्रभु के सन्निकर्ष से मानव-जीवन में यह कितनी बड़ी क्रान्ति उत्पन्न हो जाती है कि वह सदा सत्य का पालन करता है। उसका व्यवहार शुद्ध होता है। उसे किसी भी बात का भय सत्य के मार्ग से विचलित नहीं कर पाता और लोभ इन्हें आकृष्ट नहीं कर सकता। इनकी दृढ़ता लोगों के आश्चर्य का कारण बनती है। इनके जीवन में उन्हें कोई महान् शक्ति कार्य करती हुई दृष्टिगोचर होती है। दूसरे शब्दों में, इनके जीवन लोगों के सामने प्रभु की महिमा को प्रकट करते हैं।
इसीलिए मन्त्र में कहा है कि (एभिः) = इन (इन्दुभिः) = शक्तिशाली पुरुषों से ['इन्द'= be powerful] (वर्धासे)= आप [प्रभु] वृद्धि को प्राप्त करते हैं। आपकी लोगों में ख्याति होती है।

ये लोग सत्य पर दृढ़ता से चलने से सभी दिव्य गुणों को धारण कर इस मन्त्र के ऋषि ‘भरद्वाज' बनते हैं।
Essence
उपासना से मनुष्य का व्यवहार सत्यमय होता है और इन उपासकों में परमेश्वर की महिमा प्रकट होती है।
Subject
प्रभु सामीप्य का परिणाम