Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

Samveda Mantra 577

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- द्वितः आप्त्यः Chhand- उष्णिक् Swara- ऋषभः Kaand Name- पावमानं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- पावमानं पर्व
Mantra with Swara
प꣢रि꣣ को꣡शं꣢ मधु꣣श्चु꣢त꣣ꣳ सो꣡मः꣢ पुना꣣नो꣡ अ꣢र्षति । अ꣣भि꣢꣫ वाणी꣣रृ꣡षी꣢णाꣳ स꣣प्ता꣡ नू꣢षत ॥५७७॥

प꣡रि꣢꣯ । को꣡श꣢꣯म् । म꣣धुश्चु꣡त꣢म् । म꣣धु । श्चु꣡त꣢꣯म् । सो꣡मः꣢꣯ । पु꣣नानः꣢ । अ꣣र्षति । अभि꣢ । वा꣡णीः꣢꣯ । ऋ꣡षी꣢꣯णाम् । स꣣प्त । नू꣢षत ॥५७७॥

Mantra without Swara
परि कोशं मधुश्चुतꣳ सोमः पुनानो अर्षति । अभि वाणीरृषीणाꣳ सप्ता नूषत ॥

परि । कोशम् । मधुश्चुतम् । मधु । श्चुतम् । सोमः । पुनानः । अर्षति । अभि । वाणीः । ऋषीणाम् । सप्त । नूषत ॥५७७॥

Samveda - Mantra Number : 577
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 6; Ardh Prapathak » 2; Dashati » 3;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 5; Khand » 10;

Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar) - हिन्दी
Meaning
शरीर में आनन्दमयकोश का नाम ही 'मधुश्चुत् कोश' है। (सोमः) = शक्ति व सौम्यता का पुञ्ज बननेवाला व्यक्ति (पुनानः) = अपने को पवित्र बनाता हुआ (मधुश्चुतं कोशं) = माधुर्य का क्षरण करनेवाले आनन्दमयकोश की ओर (परिअर्षति) = सब प्रकार से गति करता है। अन्नमय आदि कोशों से ऊपर उठकर यह आनन्दमयकोश में स्थित होने का प्रयत्न करता है। 'शक्ति, सौम्यता व पवित्रता' इस अन्तर्मुख यात्रा के पाथेय हैं- मार्ग के भोजन हैं।

इस आनन्दमय कोश में स्थित होनेवाले (ऋषीणां) = तत्त्वद्रष्टा लोगों की (सप्ता वाणी:) = द्वारों में [कर्णौ, नासिके, चक्षणी, मुखम्] अवकीर्ण वाणी (अभि अनूषत) = सदा स्तुति ही करती है। ये किसी के लिए निन्दात्मक शब्दों का प्रयोग नहीं करते। ये आनन्दमयकोश में रहते हैं और आनन्दप्रद शब्दों को ही बोलते हैं।

अन्तिम मन्त्रभाग का अर्थ इस रूप में भी हो सकता है कि इनकी सात छन्दों में उच्चारण की जाती हुई वाणियाँ सदा उस प्रभु का स्तवन करती हैं। एवं, यह आनन्द में रहता है और उस आनन्दमय प्रभु का स्तवन करता है।

इन दोनों तत्त्वों को विस्तृत करनेवाला यह सचमुच 'द्वित' है। द्वित होने से ही यह 'आप्त्य' = प्रभु को प्राप्त करानेवालों में उत्तम भी है। 
Essence
हम निचली भूमिकाओं से ऊपर उठकर उच्च भूमिकाओं में विचरनेवाले बनें।
Subject
सरसता, सौम्यता, स्तुति