Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

Samveda Mantra 566

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- अग्निश्चाक्षुषः Chhand- उष्णिक् Swara- ऋषभः Kaand Name- पावमानं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- पावमानं पर्व
Mantra with Swara
इ꣢न्द्र꣣म꣡च्छ꣢ सु꣣ता꣢ इ꣣मे꣡ वृष꣢꣯णं यन्तु꣣ ह꣡र꣢यः । श्रु꣣ष्टे꣢ जा꣣ता꣢स꣣ इ꣡न्द꣢वः स्व꣣र्वि꣡दः꣢ ॥५६६॥

इ꣡न्द्र꣢꣯म् । अ꣡च्छ꣢꣯ । सु꣣ताः꣢ । इ꣣मे꣢ । वृ꣡ष꣢꣯णम् । य꣣न्तु । ह꣡र꣢꣯यः । श्रु꣣ष्टे꣢ । जा꣣ता꣡सः꣢ । इ꣡न्द꣢꣯वः । स्व꣣र्वि꣡दः꣢ । स्वः꣣ । वि꣡दः꣢꣯ ॥५६६॥

Mantra without Swara
इन्द्रमच्छ सुता इमे वृषणं यन्तु हरयः । श्रुष्टे जातास इन्दवः स्वर्विदः ॥

इन्द्रम् । अच्छ । सुताः । इमे । वृषणम् । यन्तु । हरयः । श्रुष्टे । जातासः । इन्दवः । स्वर्विदः । स्वः । विदः ॥५६६॥

Samveda - Mantra Number : 566
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 6; Ardh Prapathak » 2; Dashati » 3;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 5; Khand » 10;

Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar) - हिन्दी
Meaning
प्रस्तुत मन्त्र का छन्द 'उष्णिक्' है [उत् स्निह] - उत्कृष्ट स्नेह का यह संकेत कर रहा है। 'उत्कृष्ट स्नेह' करनेवाला व्यक्ति ही 'अग्नि' = आगे बढ़नेवाला होता है। जीवन का सूत्र ‘आगे बढ़ना' यही होना चाहिए। ऐसा सूत्र बनानेवाला सफल तभी होता है जब वह 'चाक्षुषय' होता है–प्रत्येक वस्तु को सूक्ष्मता से देखता है।

इस व्यक्ति का ध्येय होता है कि (इमे) = ये (सुता:) = सात्त्विक भोजन से उत्पन्न हुए-हुए सोम (इन्द्रम् अच्छ) = उस प्रभु की ओर (यन्तु) = चलें, जो प्रभु (वृषणम्) = शक्तिशाली हैं- हमपर सुखों की वर्षा करनेवाले हैं। यह सोम हमें उस ('बृहत् सोम') = परमात्मा से मिलाता है।

ये सोम (हरयः) = हमारे सब दुःखों का हरण करनेवाले हैं। ये शरीर में रोगकृमियों को उत्पन्न ही नहीं होने देते और उत्पन्न रोगकृमियों का संहार कर हमारी व्याधियों का हरण करते हैं। शक्तिशाली बनाकर हमारे मनों को भी निर्मल कर देते हैं, बुद्धि की कुण्ठा को दूर करते हुए ये सचमुच (श्रुष्टे) = परमकल्याण के लिए ही [श्रुष्टी- सुख-नि०] (जातास:) = आविर्भूत हुए हैं। इनका उत्पादन प्रभु ने हमारे परमसुख के लिए किया है। क्योंकि (इन्दवः) = ये शक्तिशाली बनानेवाले हैं। सोम हमें पवित्र भी करते हैं और सशक्त भी बनाते हैं। इस प्रकार ये हमें (स्वः विदः) = उस स्वयं देदीप्यमान ज्योति - प्रभु को प्राप्त करानेवाले होते हैं। 
Essence
सोम मुझे 'बृहत् सोम' को प्राप्त कराये।
Subject
परमकल्याण के लिए