Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

Samveda Mantra 488

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- बृहन्मतिराङ्गिरसः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः Kaand Name- पावमानं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- पावमानं पर्व
Mantra with Swara
पु꣣नानो꣡ अ꣢क्रमीद꣣भि꣢꣫ विश्वा꣣ मृ꣢धो꣣ वि꣡च꣢र्षणिः । शु꣣म्भ꣢न्ति꣣ वि꣡प्रं꣢ धी꣣ति꣡भिः꣢ ॥४८८॥

पु꣣नानः꣢ । अ꣣क्रमीत् । अभि꣢ । वि꣡श्वाः꣢꣯ । मृ꣡धः꣢꣯ । वि꣡च꣢꣯र्षणिः । वि । च꣣र्षणिः । शुम्भ꣡न्ति꣢ । वि꣡प्र꣢꣯म् । वि । प्र꣢꣯म् । धीति꣡भिः ॥४८८॥

Mantra without Swara
पुनानो अक्रमीदभि विश्वा मृधो विचर्षणिः । शुम्भन्ति विप्रं धीतिभिः ॥

पुनानः । अक्रमीत् । अभि । विश्वाः । मृधः । विचर्षणिः । वि । चर्षणिः । शुम्भन्ति । विप्रम् । वि । प्रम् । धीतिभिः ॥४८८॥

Samveda - Mantra Number : 488
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 6; Ardh Prapathak » 1; Dashati » 1;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 5; Khand » 3;

Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar) - हिन्दी
Meaning
(पुनान:) = हमारे जीवनों को पवित्र करता हुआ यह सोम (विचर्षणि:) = बहूत सूक्ष्म दृष्टिवालातत्त्व-ज्ञानी की दृष्टि को उत्पन्न करनेवाला - (विश्वा मृधः) = अन्दर घुस आनेवाली, कुचल डालनेवाली [मृध्murder] सभी काम-क्रोधादि वृत्तियों को (अभि अक्रमीत्) = आक्रान्त करता है। सोम की रक्षा से हमारा जीवन पवित्र होता है। यह सोम रोमकृमियों पर आक्रमण करके हमारे शरीरों को स्वस्थ बनाता है और वासनाओं पर आक्रमण करके हमारे मनों को निर्मल बनाता है। बुद्धि की कुण्ठता को दूर करके बुद्धि को यह तीव्र बनाता है । एवं यह सोम 'वि-प्र' है- - हमारा विशेषरूप से पूरण करनेवाले सोम को देवलोग (धीतिभिः) = ध्यान के द्वारा (शुम्भन्ति) = अपने शरीर में सुशोभित करते हैं। इस सोम के शरीर में सुरक्षित रखने का सर्वमहान उपाय प्रभु का ध्यान ही है। सदा प्रभु का चिन्तन करनेवाला व्यक्ति वासनाओं का शिकार नहीं होता और सोम को सुरक्षित कर पाता है। इसकी रक्षा से यह बड़ी तीव्र बुद्धिवाला बनता है-अतः ‘बृहन्मति' कहलाता है और शक्तिशाली बनने से 'आङ्गिरस' होता है।
Essence
मैं सदा प्रभु का स्मरण करनेवाला बनूँ।
Subject
ध्यान के द्वारा