Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

Samveda Mantra 487

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- अहमीयुराङ्गिरसः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः Kaand Name- पावमानं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- पावमानं पर्व
Mantra with Swara
उ꣢पो꣣ षु꣢ जा꣣त꣢म꣣प्तु꣢रं꣣ गो꣡भि꣢र्भ꣣ङ्गं꣡ परि꣢꣯ष्कृतम् । इ꣡न्दुं꣢ दे꣣वा꣡ अ꣢यासिषुः ॥४८७॥

उ꣡प꣢꣯ । उ꣣ । सु꣢ । जा꣣त꣢म् । अ꣣प्तु꣡र꣢म् । गो꣡भिः꣢ । भ꣣ङ्ग꣢म् । प꣡रि꣢꣯ष्कृतम् । प꣡रि꣢꣯ । कृ꣣तम् । इ꣡न्दु꣢꣯म् । दे꣣वाः꣢ । अ꣣यासिषुः ॥४८७॥

Mantra without Swara
उपो षु जातमप्तुरं गोभिर्भङ्गं परिष्कृतम् । इन्दुं देवा अयासिषुः ॥

उप । उ । सु । जातम् । अप्तुरम् । गोभिः । भङ्गम् । परिष्कृतम् । परि । कृतम् । इन्दुम् । देवाः । अयासिषुः ॥४८७॥

Samveda - Mantra Number : 487
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 6; Ardh Prapathak » 1; Dashati » 1;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 5; Khand » 3;

Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar) - हिन्दी
Meaning
प्रस्तुत मन्त्र का ऋषि 'अमहीयु' = पार्थिव भोगों की कामना न करनेवाला कहता है कि (उप) = समीपता से, उ निश्चयपूर्वक सु उत्तमप्रकार से (जातम्) = विकास करनेवाले (इन्दुम्) = सोम को (देवा:) = देवलोग (अयासिषुः) = प्राप्त करते हैं। यदि एक बालक ब्रह्मचर्य आश्रम में माता, पिता व आचार्य की समीपता में निवास करता है और गृहस्थ बनने पर विद्वान् अतिथियों के सान्निध्य को प्राप्त करता है, प्रातः सायं प्रभु की उपासना करता है तो उस व्यक्ति का जीवन संयम-प्रवण रहता है बौर सोम उसके शरीर में व्याप्त होकर उसके उत्तम विकास का कारण बनता है। यह सोम (गोभिः) = ज्ञानप्रद वेदवाणियों के साथ (अप्-तुरम्) = उसके अन्दर कर्मों को त्वरा से- शीघ्रता से करानेवाला होता है। सोमी पुरुष को आलस्य नहीं व्यापता। न ही काम-क्रोध आदि वासनाएँ उसके मार्ग में विघातक होती हैं। यह (भर्गम्) = कामादि का मर्दन करनेवाला है-उ है - उन वासनाओं को कुचल डालनेवाला है और इस प्रकार (परिष्कृतम्) = यह जीवन को बड़ा परिष्कृत - शुद्ध बनानेवाला है।

एवं सोम के सुरक्षित होने पर जीवन में निम्न परिणाम उत्पन्न होते हैं - १. उत्तम विकास, २. ज्ञानपूर्वक शीघ्रता से कार्य करने की शक्ति ३. वासनाओं का भङ्ग और ४. जीवन का परिमार्जन। इस प्रकार जीवन को उत्तम बनानेवाले इस सोम को प्राप्त वे ही करते हैं जो कि 'देवा: ' = देव बनने का प्रयत्न करते हैं। 
Essence
मैं देव बनने का निश्चय करूँ।
Subject
देव-लोग