Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

Samveda Mantra 451

1875 Mantra
Devata- उषाः Rishi- संवर्त आङ्गिरसः Chhand- द्विपदा विराट् Swara- पञ्चमः Kaand Name- ऐन्द्रं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- ऐन्द्रं पर्व
Mantra with Swara
उ꣣षा꣢꣫ अप꣣ स्व꣢सु꣣ष्ट꣢मः꣣ सं꣡ व꣢र्त्तयति वर्त꣣नि꣡ꣳ सु꣢जा꣣त꣡ता꣢ ॥४५१

उ꣣षाः꣢ । अ꣡प꣢꣯ । स्व꣡सुः꣢꣯ । त꣡मः꣢꣯ । सम् । व꣣र्त्तयति । वर्त्तनि꣢म् । सु꣣जात꣡ता꣢ । सु꣣ । जात꣣ता꣢ ॥४५१॥१

Mantra without Swara
उषा अप स्वसुष्टमः सं वर्त्तयति वर्तनिꣳ सुजातता ॥४५१

उषाः । अप । स्वसुः । तमः । सम् । वर्त्तयति । वर्त्तनिम् । सुजातता । सु । जातता ॥४५१॥१

Samveda - Mantra Number : 451
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 5; Ardh Prapathak » 2; Dashati » 2;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 4; Khand » 11;

Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar) - हिन्दी
Meaning
अस्त होता हुआ सूर्य रात्रि को जन्म देता है और उदय होता हुआ उष:काल को । एवं, रात्रि व उषा दोनों ही बहनें हैं। उषा आती है और अपनी बहिन रात्रि के अन्धकार को दूर भगा देती है। मन्त्र में इसी बात को इन शब्दों में कहा गया है कि (उषा:) = उष:काल (स्वसुः) = अपनी बहिन रात्रि के (तमः) = अन्धकार को (अप) = दूर (संवर्तयति) = भगा देती है। उष:काल होते ही प्रकाश हो जाता है - अन्धकार का नाम व चिन्ह भी नहीं रहता। इस प्रकार उष:काल का प्रथम उपदेश यही है कि हम अन्धकार को दूर करके प्रकाश प्राप्त करेंगे।

उषा रात्रि के अन्धकार को दूर करके (सु-जा-त-ता) = कुलीनतापूर्वक (वर्तनिम्) = मार्ग को (संवर्तयति) = तय करती है। कुलीनता के अभाव में कुछ अभिमान व औद्धृत्य की गन्ध आती है। सूर्य में कुछ तेजी है परन्तु उषा कितनी शान्त है- कितनी प्रसादमय है। प्रकाश के साथ सर्वत्र ताप है परन्तु उषा के प्रकाश में ताप नहीं । ज्येष्ठ मास में भी, जबकि सूर्य असह्य तापवाला हो जाता है, उषा शान्त ही बनी रहती है। हम भी अपने व्यवहार में कुलीन बनें। हमें ज्ञान व किसी भी शक्ति का गर्व न हो। हम प्रकाश व कुलीनता के साथ अपने मार्ग पर उत्तम ढङ्ग से चलते चलें–‘संवर्त' बनें। ‘संवर्त'-उत्तम ढङ्ग से चलनेवाला होने के कारण ही यह ‘आंगिरस' है-शक्ति- सम्पन्न अङ्गोवाला है।
Essence
मैं उषा से उपदेश लेकर प्रकाशमय जीवनवाला बनूँ तथा मेरा व्यवहार कुलीनता का सूचक हो– उसमें meannes = कमीनापन की गंध न हो।
Subject
उषा का उपदेश - प्रकाश व कुलीनता