Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

Samveda Mantra 396

1875 Mantra
Devata- इन्द्रः Rishi- विश्वमना वैयश्वः Chhand- उष्णिक् Swara- ऋषभः Kaand Name- ऐन्द्रं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- ऐन्द्रं पर्व
Mantra with Swara
वे꣢त्था꣣ हि꣡ निरृ꣢꣯तीनां꣣ व꣡ज्र꣢हस्त परि꣣वृ꣡ज꣢म् । अ꣡ह꣢रहः शु꣣न्ध्युः꣡ प꣢रि꣣प꣡दा꣢मिव ॥३९६॥

वे꣡त्थ꣢꣯ । हि꣡ । नि꣡र्ऋ꣢꣯तीनाम् । निः । ऋ꣣तीनाम् । व꣡ज्र꣢꣯हस्त । व꣡ज्र꣢꣯ । ह꣣स्त । परिवृ꣡ज꣢म् । प꣣रि । वृ꣡ज꣢꣯म् । अ꣡ह꣢꣯रहः । अ꣡हः꣢꣯ । अ꣣हः । शुन्ध्युः꣢ । प꣣रिप꣡दा꣢म् । प꣣रि । प꣡दा꣢꣯म् । इ꣣व ॥३९६॥

Mantra without Swara
वेत्था हि निरृतीनां वज्रहस्त परिवृजम् । अहरहः शुन्ध्युः परिपदामिव ॥

वेत्थ । हि । निर्ऋतीनाम् । निः । ऋतीनाम् । वज्रहस्त । वज्र । हस्त । परिवृजम् । परि । वृजम् । अहरहः । अहः । अहः । शुन्ध्युः । परिपदाम् । परि । पदाम् । इव ॥३९६॥

Samveda - Mantra Number : 396
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 5; Ardh Prapathak » 1; Dashati » 1;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 4; Khand » 5;

Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar) - हिन्दी
Meaning
हे (वज्रहस्त) = [वज् गतौ ] गतिशील हाथवाले - अर्थात् सदा क्रियामय जीवन बितानेवाले! तू (हि) = निश्चय से निर्ऋतीनां दुर्गतियों के (परिवृजम्) = सर्वथा वर्जन को (वेत्था) = जानता है, अनुभव करता है। (‘नहि क्ल्याणकृत कश्चित् दुर्गतिं तात गच्छति') = शुभ कार्यों को करनेवाला कोई भी कभी दुर्गति को प्राप्त नहीं होता। जिसका भी जीवन क्रियाशील हैं वह सांसारिक ऐश्वर्य को प्राप्त करता ही है। निर्धनता उसका भाग्य नहीं है।( 'कृतं मे दक्षिणे हस्ते जयो मे सव्य आहित:'), उसके दाहिने हाथ पुरुषार्थ है तो बायें में विजय ।( 'कर्मणे हस्तौ विसृष्टौ')=कर्म करने के लिए ही हाथ दिये गए हैं। जो भी व्यक्ति इनको क्रिया में व्याप्त रखता है, वह सदा अभ्युदय को प्राप्त करता है।

इसके साथ ही (अहरहः) = प्रतिदिन (परिपदाम् इव) = जो सदा गतिवाले होते हैं उनके समान यह (शुन्ध्युः) = अपना शोधन करनेवाला होता है। क्रियाशील व्यक्ति आत्मिक दृष्टिकोण से
निर्मल रहता है, उसके मन में अशुभ विचार उत्पन्न नहीं होते। इसका मन निर्मल होकर उदार बन गया है। सभीके प्रति उत्तम मनवाला यह 'विश्वमना' है और उत्तम कर्मेन्द्रियोंवाला होने से 'वैयश्व' है।
Essence
मैं क्रियाशील बनकर दुर्गति व मलों से दूर रहूँ।
Subject
दुर्गति से दूर व निर्मल