Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

Samveda Mantra 386

1875 Mantra
Devata- इन्द्रः Rishi- विश्वमना वैयश्वः Chhand- उष्णिक् Swara- ऋषभः Kaand Name- ऐन्द्रं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- ऐन्द्रं पर्व
Mantra with Swara
ए꣢न्दु꣣मि꣡न्द्रा꣢य सिञ्चत꣣ पि꣡बा꣢ति सो꣣म्यं꣡ मधु꣢꣯ । प्र꣡ राधा꣢꣯ꣳसि चोदयते महित्व꣣ना꣢ ॥३८६॥

आ꣢ । इ꣡न्दु꣢꣯म् । इ꣡न्द्रा꣢꣯य । सि꣣ञ्चत । पि꣡बा꣢꣯ति । सो꣣म्य꣢म् । म꣡धु꣢꣯ । प्र । रा꣡धाँ꣢꣯सि । चो꣣दयते । महित्वना꣢ ॥३८६॥

Mantra without Swara
एन्दुमिन्द्राय सिञ्चत पिबाति सोम्यं मधु । प्र राधाꣳसि चोदयते महित्वना ॥

आ । इन्दुम् । इन्द्राय । सिञ्चत । पिबाति । सोम्यम् । मधु । प्र । राधाँसि । चोदयते । महित्वना ॥३८६॥

Samveda - Mantra Number : 386
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 4; Ardh Prapathak » 2; Dashati » 5;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 4; Khand » 4;

Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar) - हिन्दी
Meaning
१. (इन्दुम्) = सोम को (इन्द्राय) = उस सर्वैश्वर्यशाली प्रभु की प्राप्ति के लिए (आसिञ्चत) = अपने अन्दर सींचो, अर्थात् सोम के अपने अन्दर पान का सर्वोत्तम लाभ तो यही है कि इससे मनुष्य प्रभु के प्राप्ति के योग्य बनता है। भोगमार्ग में सोम का अपव्यय है- योगमार्ग में सोम ज्ञानाग्नि का ईंधन बनता है, और तब उस तीव्र बुद्धि से मनुष्य परमेश्वर का दर्शन करता है।

२. प्रस्तुत मन्त्र का ऋषि (‘विश्वमनाः वैयश्व') = इस सारी बात का ध्यान करके सोम्यं मधु=सोम सम्बन्धी मधु का पिबाति = पान करता है। अन्य मधु सोम्य नहीं है, यह सोमपान रूपी मधुपान सोम्य नहीं है। यह हमें सोम व विनीत बनानेवाला है। अन्य मधुओं के पान से मनुष्य गर्वित हो जाता है तो इस सोम का पान करके वह गौरव का अनुभव करते हुए भी अधिक से अधिक विनीत होता है ।

३. यह सोम (महित्वना) - महिमा की प्राप्ति के द्वारा (राधांसि) = सफलताओं को [राध्=संसिद्धि] (प्रचोदयते)=प्रकर्षेण प्रेरित करता है, अर्थात् सोमपान करनेवाले को यह सोम सदा सफल बनाता है। सोमपान करनेवाला कभी असफल नहीं होता।

सोमपान के तीन लाभ हैं १. प्रभु की प्राप्ति २. विनीतता ३. तथा साफल्य 
Essence
सोमपान के द्वारा मैं सफल बनूँ पर विनीत रहूँ और इस प्रकार प्रभु को प्राप्त करूँ।
 
Subject
सोम सेचन के लाभ
Footnote
सोमपान के द्वारा मैं सफल बनूँ पर विनीत रहूँ और इस प्रकार प्रभु को प्राप्त करूँ।