Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

Samveda Mantra 34

1875 Mantra
Devata- अग्निः Rishi- उशना काव्यः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः Kaand Name- आग्नेयं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- आग्नेयं पर्व
Mantra with Swara
क꣡स्य꣢ नू꣣नं꣡ प꣢꣯रीणसि꣣ धि꣡यो꣢ जिन्वसि सत्पते । गो꣡षा꣢ता꣣ य꣡स्य꣢ ते꣣ गि꣡रः꣢ ॥३४॥

क꣡स्य꣢꣯ । नू꣣न꣢म् । प꣡री꣢꣯णसि । प꣡रि꣢꣯ । न꣣सि । धि꣡यः꣢꣯ । जि꣣न्वसि । सत्पते । सत् । पते । गो꣡षा꣢꣯ता । गो꣢ । सा꣣ता । य꣡स्य꣢꣯ । ते꣣ । गि꣡रः꣢꣯ ॥३४॥

Mantra without Swara
कस्य नूनं परीणसि धियो जिन्वसि सत्पते । गोषाता यस्य ते गिरः ॥

कस्य । नूनम् । परीणसि । परि । नसि । धियः । जिन्वसि । सत्पते । सत् । पते । गोषाता । गो । साता । यस्य । ते । गिरः ॥३४॥

Samveda - Mantra Number : 34
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 1; Ardh Prapathak » 1; Dashati » 3;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 1; Khand » 3;

Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar) - हिन्दी
Meaning
१. हे (सत्पते)=सयनों के रक्षक प्रभो! यह शब्द हमें बोध दे रहा है कि हम सयन बनें, वे प्रभु हमारी रक्षा करेंगे।

२. (नूनम्) = निश्चय से आप (कस्य)=सुख की (परीणसि)= पालन व पूरण करनेवाली [ पृ पालनपूरणयोः] (धियः)=बुद्धियों को (जिन्वसि)= देते हो। इस वाक्य का बोध स्पष्ट है कि प्रभु की दी हुई प्रेरणाएँ हमारे कल्याण की साधिका हैं। हम उन्हें सुनेंगे तो हमारा कल्याण अवश्य होगा। हृदयस्थ उस प्रभु की आवाज़ को हम न भी सुन पाएँ तो वेदस्थ उसके शब्दों को तो पढ़ व सुन ही सकते हैं। हमें उन्हें पढ़ और सुनकर अपने जीवन को कल्याणमय बनाना चाहिए।

३. हे प्रभो ! (यस्य )= जिस ते आपकी (गिरः) = वाणियाँ (गोषाता)=[गो+सन्] ज्ञान से सनी हुई हैं। प्रभु की वेदवाणियाँ ज्ञान - रस परिपूर्ण हैं | वेद क्या हैं?( “रायः समुद्रान् चतुरः ”) ये ज्ञान के चार समुद्र हैं। समुद्र भी रत्नाकर होते हैं, ये भी ज्ञानरत्नों से भरे पड़े हैं। इससे हमें भी यह बोध लेना चाहिए कि हमारी वाणियाँ ज्ञान से भरी हों । हमारी परस्पर बातचीत हमारे ज्ञान को बढ़ानेवाली हों । इस बोध को प्राप्त करके हम सभी के साथ प्रेम करनेवाले, सभी का हित चाहनेवाले इस मन्त्र के ऋषि 'उशना' बनेंगे। 
Essence
 हम सयन बनें, प्रभु प्रेरणा को सुनें, हमारे वार्तालाप भी प्रकाशमय हों।
Subject
ज्ञान से सनी वाणियाँ