Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

Samveda Mantra 309

1875 Mantra
Devata- इन्द्रः Rishi- वसिष्ठो मैत्रावरुणिः Chhand- बृहती Swara- मध्यमः Kaand Name- ऐन्द्रं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- ऐन्द्रं पर्व
Mantra with Swara
अ꣣भी꣢ष꣣त꣢꣫स्तदा भ꣣रे꣢न्द्र꣣ ज्या꣢यः꣣ क꣡नी꣢यसः । पु꣣रूव꣢सु꣣र्हि꣡ म꣢घवन्ब꣣भू꣡वि꣢थ꣣ भ꣡रे꣢भरे च꣣ ह꣡व्यः꣢ ॥३०९॥

अ꣣भि꣢ । स꣣तः꣢ । तत् । आ । भ꣣र । इ꣡न्द्र꣢꣯ । ज्या꣡यः꣢꣯ । क꣡नी꣢꣯यसः । पु꣣रूव꣡सुः꣢ । पु꣣रु । व꣡सुः꣢꣯ । हि । म꣣घवन् । बभू꣡वि꣢थ । भ꣡रे꣢꣯भरे । भ꣡रे꣢꣯ । भ꣣रे । च । ह꣡व्यः꣢꣯ ॥३०९॥

Mantra without Swara
अभीषतस्तदा भरेन्द्र ज्यायः कनीयसः । पुरूवसुर्हि मघवन्बभूविथ भरेभरे च हव्यः ॥

अभि । सतः । तत् । आ । भर । इन्द्र । ज्यायः । कनीयसः । पुरूवसुः । पुरु । वसुः । हि । मघवन् । बभूविथ । भरेभरे । भरे । भरे । च । हव्यः ॥३०९॥

Samveda - Mantra Number : 309
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 4; Ardh Prapathak » 1; Dashati » 2;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 3; Khand » 8;

Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar) - हिन्दी
Meaning
जब जीव इन्द्रियरूप घोड़ों को शरीररूप रथ में जोतकर अपने ब्रह्मलोकरूप घर की ओर वापिस चल देता है तो प्रभु से प्रार्थना करता है कि (अभि) = ब्रह्मलोक की ओर (सतः) = विद्यमान जो मैं हूँ उस मुझ में हे (इन्द्र) = परमैश्वर्यशाली प्रभो! (तत् आभर) = वह शक्ति भरिए, जिससे कि मैं अपनी इस यात्रा को पूर्ण कर सकूँ । (ज्याय:) = आप बड़े हैं, (कनीयसः) = मैं छोटा हूँ, मुझ छोटे को आप शक्ति अवश्य ही देंगे। बड़ा भाई छोटे का ध्यान करता ही है। आप परमात्मा हैं, तो मैं आत्मा हूँ। आप इन्द्र और मैं उपेन्द्र । हे (मघवन्) = पवित्र एश्वर्यवाले प्रभो ! हि निश्चय से आप (पुरुवसुः) = पालक और पूरक धनवाले (बभूविथ) = हैं। मुझे भी यही धन प्राप्त कराइए जिससे मैं सब विघ्नों को जीतता हुआ यात्रा को पूर्ण कर सकूँ । (भरे भरे च हव्यः) = जब मुझे पुन: इस शरीररूप यन्त्र को शक्ति से भरने की [बैटरी का रिचार्ज करवाने की] आवश्यकता होती है, तो आप ही पुकारने योग्य होते हैं। आपको ही तो फिर-फिर इस यन्त्र में शक्ति भरना है। आपसे शक्ति प्राप्त करके ही मैं इन कामादि शत्रुओं से संग्राम में विजयी हो सकूँगा। आपसे शक्ति प्राप्त करके ही मैं इन घोड़ों का पूर्णरूपेण वश में करनेवाला इस मन्त्र का ऋषि वसिष्ठ बन पाता हूँ, अथवा आपकी कृपा से फिर से उत्तम निवासवाला 'वसिष्ठ' मैं होता हूँ।
Essence
प्रभु से अपने को जोड़कर मैं इस शरीररूप यन्त्र को शक्ति से फिर-फिर भर लेनेवाला बनूँ।
Subject
मैं छोटा भाई ही तो हूँ