Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

Samveda Mantra 30

1875 Mantra
Devata- अग्निः Rishi- वामदेवो गौतमः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः Kaand Name- आग्नेयं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- आग्नेयं पर्व
Mantra with Swara
प꣢रि꣣ वा꣡ज꣢पतिः क꣣वि꣢र꣣ग्नि꣢र्ह꣣व्या꣡न्य꣢क्रमीत् । द꣢ध꣣द्र꣡त्ना꣢नि दा꣣शु꣡षे꣢ ॥३०॥

प꣡रि꣢꣯ । वा꣡ज꣢꣯पतिः । वा꣡ज꣢꣯ । प꣣तिः । कविः꣢ । अ꣣ग्निः꣢ । ह꣣व्या꣡नि꣢ । अ꣣क्रमीत् । द꣡ध꣢꣯त् । र꣡त्ना꣢꣯नि । दा꣣शु꣡षे꣢ ॥३०॥

Mantra without Swara
परि वाजपतिः कविरग्निर्हव्यान्यक्रमीत् । दधद्रत्नानि दाशुषे ॥

परि । वाजपतिः । वाज । पतिः । कविः । अग्निः । हव्यानि । अक्रमीत् । दधत् । रत्नानि । दाशुषे ॥३०॥

Samveda - Mantra Number : 30
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 1; Ardh Prapathak » 1; Dashati » 3;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 1; Khand » 3;

Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar) - हिन्दी
Meaning
(वाजपतिः)=सब अन्नों का पति और (कवि:)= क्रान्तदर्शी (अग्निः)= अग्रगति व उन्नति को सिद्ध करनेवाला वह प्रभु (हव्यानि)= दानपूर्वक अदन योग्य इन पदार्थों को [हु दान + अदन] (परि अक्रमीत्)= चारों ओर व्याप्त कर रहा है। वह प्रभु अनगिनत अन्नों का स्वामी है। उसने सब प्राणियों के निवास स्थानों में, उस- उस स्थान के जल-वायु के अनुकूल खाद्य पदार्थ प्राप्त कराये हैं। (दाशुषे) = आत्मसमर्पण करनेवाले के लिए वे प्रभु (रत्नानि )= उत्तम पदार्थों को (दधत्)= धारण करते हैं।

उत्तमोत्तम पदार्थ हमारे चारों ओर विद्यमान हैं। 'उनमें कौन-सा हमारे लिए इस समय उपादेय है कौन-सा नहीं' यह बात अल्पज्ञतावश हम ठीक-ठीक नहीं समझते। वह प्रभु क्रान्तदर्शी=तत्त्वज्ञ होने से ठीक-ठीक समझता है। हमें चाहिए कि हम प्रभु के प्रति आत्मसमर्पण करते हुए परिश्रम के परिणाम के रूप में पदार्थों को प्राप्त कराने का भार उस प्रभु पर ही डाल दें। वे ठीक पदार्थों को - रत्नों को सर्वोत्तम वस्तुओं को प्राप्त कराके हमारी अग्रगति का साधन करेंगे। इसलिए तो वे प्रभु अग्नि कहलाते हैं।

जीव को चाहिए कि प्रभु के प्रति समर्पण कर दे और यही आराधना करे कि जिस स्थिति में आप ठीक समझते हैं, उसमें रखिए, तभी हम अपने जीवन को उत्तम गुणों से सम्पन्न बनाकर इस मन्त्र के ऋषि 'वामदेव' होंगे।
Essence
हम प्रभु के प्रति अपना समर्पण करें, वे हमें रत्न प्राप्त कराएँगे ।
Subject
समर्पण