Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

Samveda Mantra 29

1875 Mantra
Devata- अग्निः Rishi- गोपवन आत्रेयः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः Kaand Name- आग्नेयं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- आग्नेयं पर्व
Mantra with Swara
तं꣡ त्वा꣢ गो꣣प꣡व꣢नो गि꣣रा꣡ जनि꣢꣯ष्ठदग्ने अङ्गिरः । स꣡ पा꣢वक श्रुधी꣣ ह꣡व꣢म् ॥२९॥

त꣢म् । त्वा꣣ । गो꣣प꣡व꣢नः । गि꣣रा꣢ । ज꣡नि꣢꣯ष्ठत् । अ꣣ग्ने । अङ्गिरः । सः꣢ । पा꣣वक । श्रुधी । ह꣡व꣢꣯म् ॥२९॥

Mantra without Swara
तं त्वा गोपवनो गिरा जनिष्ठदग्ने अङ्गिरः । स पावक श्रुधी हवम् ॥

तम् । त्वा । गोपवनः । गिरा । जनिष्ठत् । अग्ने । अङ्गिरः । सः । पावक । श्रुधी । हवम् ॥२९॥

Samveda - Mantra Number : 29
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 1; Ardh Prapathak » 1; Dashati » 3;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 1; Khand » 3;

Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar) - हिन्दी
Meaning
हे (अग्ने)= आगे ले-चलनेवाले प्रभो! या ज्ञानाग्नि से वासनाओं को भस्म कर देनेवाले प्रभो! (अङ्गिर)=अङ्ग-अङ्ग में बल का संचार करनेवाले प्रभो! (तम्)= उस (त्वा)= तुझे (गोपवनः)= अपनी इन्द्रियों को पवित्र करनेवाला व्यक्ति ही (गिरा)= वाणी से - संकीर्तन के द्वारा (जनिष्ठत्) = आविर्भूत करता है।

प्रभु केवल कीर्तन से प्रकट नहीं होते। कीर्तन तो दम्भ के लिए भी होता है। प्रत्येक कीर्तन करनेवाला उस प्रभु को नहीं पा सकता। वेद कहता है कि प्रभु का आभास तो ‘गोपवन' को ही होता है। गोपवन है गो= इन्द्रियों को, पवन पवित्र करनेवाला। इन्द्रियों को पवित्रकरने के लिए ही गत मन्त्र में आराधना थी कि मेरी इन्द्रियाँ दान, अर्चना व स्तुति का पाठ पढ़ें। इन तीन क्रियाओं में लगाकर इन्द्रियों को पवित्र बनानेवाला व्यक्ति ही प्रभु-दर्शन का अधिकारी होता है। प्रभु - दर्शन और उस 'सहस्रधार' में स्नान कर वह और भी अधिक पवित्र हो जाता है।

हम सब भी उस प्रभु की आराधना करते हैं कि हे (पावक)= पवित्र करनेवाले प्रभो! (सः)= वे आप (हवम्) = मेरी भी प्रार्थना को – पुकार को (श्रुधि)= सुनिए । मुझे भी पवित्रता प्राप्त करने की कामना है- मैं भी आपको पुकार रहा हूँ। प्रभो! कृपा करो कि हमारी इन्द्रियाँ पवित्र हों। हम अपनी इन्द्रियों को पवित्र बनाकर इस मन्त्र के ऋषि ‘गोपवन' बनें। 
Essence
हम अपनी इन्द्रियों को पवित्र बनाकर प्रभु-कीर्तन के अधिकारी बनें।
Subject
गो-पवन