Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

Samveda Mantra 28

1875 Mantra
Devata- अग्निः Rishi- शुनः शेप आजीगर्तिः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः Kaand Name- आग्नेयं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- आग्नेयं पर्व
Mantra with Swara
इ꣣म꣢मू꣣ षु꣢꣫ त्वम꣣स्मा꣡क꣢ꣳ स꣣निं꣡ गा꣢य꣣त्रं꣡ नव्या꣢꣯ꣳसम् । अ꣡ग्ने꣢ दे꣣वे꣢षु꣣ प्र꣡ वो꣢चः ॥२८॥

इ꣣म꣢म् । उ꣣ । सु꣢ । त्वम् । अ꣣स्मा꣡क꣢म् । स꣣नि꣢म् । गा꣣यत्र꣢म् । न꣡व्याँ꣢꣯सम् । अ꣡ग्ने꣢꣯ । दे꣣वे꣡षु꣢ । प्र । वो꣣चः ॥२८॥

Mantra without Swara
इममू षु त्वमस्माकꣳ सनिं गायत्रं नव्याꣳसम् । अग्ने देवेषु प्र वोचः ॥

इमम् । उ । सु । त्वम् । अस्माकम् । सनिम् । गायत्रम् । नव्याँसम् । अग्ने । देवेषु । प्र । वोचः ॥२८॥

Samveda - Mantra Number : 28
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 1; Ardh Prapathak » 1; Dashati » 3;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 1; Khand » 3;

Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar) - हिन्दी
Meaning
हे (अग्ने) = हमारी उन्नति व अग्रगति के साधक प्रभो! (त्वम्) = आप (अस्माकम्)= हमारे (देवेषु)= देवों में [चक्षु आदि के रूप में अङ्ग-प्रत्यङ्ग में निवास करनेवाले सूर्यादि देवों में] (मम्)= इस (सनिं गायत्रं, नव्यांसम्)=सनि आदि का (उ)= निश्चय से (सु)= अच्छी प्रकार (प्रवोचः)= प्रवचन कर दें। अच्छी तरह पाठ पढ़ा दें।

पहला पाठ ‘सनि’ का है [षणु दाने व षण संभक्तौ] हमारी प्रत्येक इन्द्रिय दान व संविभाग का पाठ पढ़े। आँख ज्ञान प्राप्त करे तो उस ज्ञान को औरों को लिए भी दे। हमारा हाथ धन कमाये तो उसे दान करना भी आये।

दूसरा पाठ ‘गायत्र' का है [गायति अर्चनकर्मा] निघण्टु में इसका अर्थ अर्चन-पूजन है। हमारा अङ्ग-प्रत्यङ्ग प्रभु की अर्चना करे। हम उसके अनन्य उपासक हों। हम प्रजा व प्राणियों के सेवक बनें।

तीसरा पाठ (नव्यान्)= का है, [नू स्तुतौ] हमारा अङ्ग प्रत्यङ्ग खूब स्तुति करनेवाला हो। हमसे किसी की निन्दा न हो। हम प्रशंसा-ही- प्रशंसा करें। निन्दात्मक शब्दों का उच्चारण न करें, न सुनें। यदि हमारी इन्द्रियाँ सचमुच ‘सनि, गायत्र व नव्यान्' अर्थात् दान, अर्चना और स्तुति का पाठ पढ़ेंगी तो हमारा जीवन तो उत्तम बनेगा ही, साथ ही हम इस संसार में सुख की वृद्धि का कारण बनेंगे और इस मन्त्र के ऋषि ‘शुन:-शेप' [सुख का निर्माण करनेवाले] कहलाने के अधिकारी होंगे।
Essence
 हमारा जीवन दानमय, प्राणी-सेवा में लगा हुआ व सदा सबके लिए शुभ भावनावाला हो ।
Subject
देवों के तीन पाठ