Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

Samveda Mantra 223

1875 Mantra
Devata- इन्द्रः Rishi- मेधातिथिः काण्वः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः Kaand Name- ऐन्द्रं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- ऐन्द्रं पर्व
Mantra with Swara
अ꣡ती꣢हि मन्युषा꣣वि꣡ण꣢ꣳ सुषु꣣वा꣢ꣳस꣣मु꣡पे꣢꣯रय । अ꣣स्य꣢ रा꣣तौ꣢ सु꣣तं꣡ पि꣢ब ॥२२३॥

अ꣡ति꣢꣯ । इ꣣हि । मन्युषावि꣡ण꣢म् । म꣣न्यु । सावि꣡न꣢म् । सु꣣षुवाँ꣡स꣢म् । उ꣡प꣢꣯ । आ । ई꣣रय । अस्य꣢ । रा꣣तौ꣢ । सु꣣त꣢म् । पि꣣ब ॥२२३॥

Mantra without Swara
अतीहि मन्युषाविणꣳ सुषुवाꣳसमुपेरय । अस्य रातौ सुतं पिब ॥

अति । इहि । मन्युषाविणम् । मन्यु । साविनम् । सुषुवाँसम् । उप । आ । ईरय । अस्य । रातौ । सुतम् । पिब ॥२२३॥

Samveda - Mantra Number : 223
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 3; Ardh Prapathak » 1; Dashati » 4;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 2; Khand » 12;

Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar) - हिन्दी
Meaning
गत मन्त्र में तीन पगों के रखने का उल्लेख था। उन पगों को रखते हुए कितने ही विघ्न उपस्थित होते हैं, कितनी ही बार असफलता का मुख देखना पड़ता है। यदि इस व्यक्ति को कोई उत्साहित न कर निरन्तर निरुत्साहित करेगा, तब यह कभी भी संसार में सफल न हो सकेगा। इसीलिए मन्त्र में कहते हैं कि (मन्युषाविणम्) = [मन्यु=शोक] शोक, दु:ख व निराशा के बीजों को बोनेवाले व्यक्ति को (अति-इहि) = लाँघ जा। ऐसे व्यक्तियों के समीप मत उठ-बैठ (सुषुवांसम्) = सदा उत्तम प्रेरणा देनेवाले के (उप) = समीप (ईरय) = गति कर । संसार में निरुत्साहित करनेवाले व्यक्तियों के सम्पर्क में आकर किसी ने सफलता प्राप्त नहीं की, इसलिए उत्साह बनाये रखने के लिए आवश्यक है कि हमारा सम्पर्क निराशावादियों से न होकर सदा आशावादियों से रहे। आशावाद में भरे हुए मनुष्य को चाहिए कि (अस्य) = प्रभु की (रातौ) = दोनों— (सुतम्)=शक्ति व ज्ञान का (पिब) = पान करे। प्रभु तुझे ज्ञान दे रहे हैं, तू उस ज्ञान को पी। प्रभु ने आहार से वीर्य की उत्पत्ति की प्रक्रिया से शक्ति दी है - तू उसे अपने में सुरक्षित कर। मनुष्य निरुत्साहित न हो, ज्ञान का संचय करता चले और शक्ति को अपने में भरता चले तो वह उल्लिखित तीनों पगों को रखने में अवश्य समर्थ होगा।
Essence
आशावादियों के सम्पर्क में चलो, ज्ञान व शक्ति का संचय करो। यही मेधातिथि का मार्ग है।
Subject
प्रभु दे रहे हैं, पी तो सही