Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

Samveda Mantra 206

1875 Mantra
Devata- इन्द्रः Rishi- वत्सः काण्वः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः Kaand Name- ऐन्द्रं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- ऐन्द्रं पर्व
Mantra with Swara
सु꣣नीथो꣢ घा꣣ स꣢꣫ मर्त्यो꣣ यं꣢ म꣣रु꣢तो꣣ य꣡म꣢र्य꣣मा꣢ । मि꣣त्रा꣢꣫स्पान्त्य꣣द्रु꣡हः꣢ ॥२०६॥

सु꣣नीथः꣢ । सु꣣ । नीथः꣢ । घ꣣ । सः꣢ । म꣡र्त्यः꣢꣯ । यम् । म꣣रु꣡तः꣢ । यम् । अ꣣र्यमा꣢ । मि꣣त्राः꣢ । मि꣣ । त्राः꣢ । पा꣡न्ति꣢꣯ । अ꣣द्रु꣡हः । अ꣣ । द्रु꣡हः꣢꣯ ॥२०६॥

Mantra without Swara
सुनीथो घा स मर्त्यो यं मरुतो यमर्यमा । मित्रास्पान्त्यद्रुहः ॥

सुनीथः । सु । नीथः । घ । सः । मर्त्यः । यम् । मरुतः । यम् । अर्यमा । मित्राः । मि । त्राः । पान्ति । अद्रुहः । अ । द्रुहः ॥२०६॥

Samveda - Mantra Number : 206
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 3; Ardh Prapathak » 1; Dashati » 2;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 2; Khand » 10;

Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar) - हिन्दी
Meaning
इस मन्त्र का ऋषि 'वत्स' है- जो अपने जीवन से वेदवाणी को कहता है [ वदति इति ] अर्थात् जिसकी जीवन-क्रियाएँ वेदानुकूल हैं, अतएव वह प्रभु का वत्स=प्रिय है। यह वत्स कहता है कि (घ) = निश्चय से (सः मर्त्यः) =  वह मनुष्य (सु-नीथः) = उत्तम नयन [मार्ग] से चलनेवाला है १. (यम्)=जिसे (मरुतः) = प्राण (पान्ति)=रक्षित करते हैं, अर्थात् प्राणायाम द्वारा प्राणों की साधना करके जो अपने को रोगों व वासनाओं से बचाता है - वह मनुष्य सुनीथ है। २. (यम्) = जिसे (अर्यमा)= [अर्यमेति तमाहुर्यो ददाति] दान की भावना सुरक्षित करती है। दान की भावना से मनुष्य व्यसनों से बचकर अपने जीवन को शुद्ध बना पाता है। ३.(यम्) = जिसे (मित्रः) = स्नेह की देवता रक्षित करती है। प्राणिमात्र के प्रति स्नेह की भावनावाला होने के कारण यह व्यक्ति राग-द्वेष से ऊपर उठता है।

‘प्राणों की साधना, देने की वृत्ति और स्नेह की भावना' ये तीनों ही मनुष्य को गिरने नहीं देतीं, दूसरे शब्दों में ये तीनों मिलकर 'जीवन का मार्ग' हैं। इन वृत्तियों को अपनानेवाला व्यक्ति (अद्रुहः)=कभी हिंसित नहीं होता। हिंसित क्यों हो? यह तो प्रभु का 'वत्स' = प्यारा है।
Essence
मरुत्, अर्यमा और मित्र के मार्ग पर चलकर मैं प्रभु का ‘वत्स’ बनूँ।
Subject
उत्तम मार्ग