Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

Samveda Mantra 1868

1875 Mantra
Devata- इन्द्रः Rishi- शासो भारद्वाजः Chhand- अनुष्टुप् Swara- गान्धारः
Mantra with Swara
वि꣡ न꣢ इन्द्र꣣ मृ꣡धो꣢ जहि नी꣣चा꣡ य꣢च्छ पृतन्य꣣तः꣢ । यो꣢ अ꣣स्मा꣡ꣳ अ꣢भि꣣दा꣢स꣣त्य꣡ध꣢रं गमया꣣ त꣡मः꣢ ॥१८६८॥

वि । नः꣣ । इन्द्र । मृ꣡धः꣢꣯ । ज꣣हि । नीचा꣢ । य꣣च्छ । पृतन्यतः꣢ । यः । अ꣣स्मा꣢न् । अ꣣भिदा꣡स꣢ति । अ꣣भि । दा꣡स꣢꣯ति । अ꣡ध꣢꣯रम् । ग꣣मय । त꣡मः꣢꣯ ॥१८६८॥

Mantra without Swara
वि न इन्द्र मृधो जहि नीचा यच्छ पृतन्यतः । यो अस्माꣳ अभिदासत्यधरं गमया तमः ॥

वि । नः । इन्द्र । मृधः । जहि । नीचा । यच्छ । पृतन्यतः । यः । अस्मान् । अभिदासति । अभि । दासति । अधरम् । गमय । तमः ॥१८६८॥

Samveda - Mantra Number : 1868
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 9; Ardh Prapathak » 3;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 21; Khand » 1;

Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar) - हिन्दी
Meaning
प्रभु ने जीव को आदेश दिया था कि 'लोभ, काम, क्रोध' को दूर भगा दे। प्रभु का उपासक इस आदेश को सुनता है और प्रार्थना करता है कि हे (इन्द्र) = परमैश्वर्यशाली प्रभो ! (नः) = हमारी (मृधः) = हत्या करनेवाले इन लोभ, काम, क्रोधादि भावों को (विजहि) = आप पूर्णरूप से नष्ट कर दें । (पृतन्यतः) = सेना के रूप में हमपर आक्रमण करनेवाले इन आसुर भावों को (नीचा यच्छ) = नीचा दिखाओ, अर्थात् युद्ध में हम इनसे हार न जाएँ — हम सदा इनके पराजित करनेवाले बनें । हे प्रभो ! (यः) = जो (तमः) = तमोगुण अथवा अज्ञान (अस्मान्) = हमें (अभिदासति) = सब प्रकार से अपना दास बना लेता है और इस प्रकार हमारे दोनों लोकों का क्षय करनेवाला होता है, उस तम को (अधरं गमय) = आप इस अध्यात्म-संग्राम में नीचा दिखाइए - पराजित करा दीजिए। आपकी कृपा से मैं इनसे पराजित न होऊँ और आपकी शक्ति से शक्ति सम्पन्न होकर इन्हें पराजित करनेवाला बनूँ('त्वा युजा वनेम तत्')=आप मित्र के साथ मैं इन्हें जीत लूँ ।

वासनाओं का जीतना आवश्यक है नहीं तो ये हमारा नाश कर देंगी, इनकी विजय प्रभु की सहायता के बिना सम्भव नहीं ।
Essence
प्रभु का सच्चा भक्त इसी रूप में प्रार्थना करता है कि आप कामादि को नष्ट कीजिए । इनके नाश के लिए मेरे तम को दूर कीजिए, अज्ञान के नाश से ही इनका नाश होगा ।
Subject
तमोगुण का अधरीकरण