Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

Samveda Mantra 1772

1875 Mantra
Devata- इन्द्रः Rishi- प्रियमेध आङ्गिरसः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
तु꣡वि꣢शुष्म꣣ तु꣡वि꣢क्रतो꣣ श꣡ची꣢वो꣣ वि꣡श्व꣢या मते । आ꣡ प꣢प्राथ महित्व꣣ना꣢ ॥१७७२॥

तु꣡वि꣢꣯शुष्म । तु꣡वि꣢꣯ । शु꣣ष्म । तु꣡वि꣢꣯क्रतो । तु꣡वि꣢꣯ । क्र꣣तो । श꣡ची꣢꣯वः । वि꣡श्व꣢꣯या । म꣣ते । आ꣢ । प꣣प्राथ । महित्वना꣢ ॥१७७२॥

Mantra without Swara
तुविशुष्म तुविक्रतो शचीवो विश्वया मते । आ पप्राथ महित्वना ॥

तुविशुष्म । तुवि । शुष्म । तुविक्रतो । तुवि । क्रतो । शचीवः । विश्वया । मते । आ । पप्राथ । महित्वना ॥१७७२॥

Samveda - Mantra Number : 1772
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 9; Ardh Prapathak » 1;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 20; Khand » 1;

Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar) - हिन्दी
Meaning
प्रियमेध प्रभु को ही जीवन-यात्रा का रथ बनाता है और आराधना करता है कि १. (तुविशुष्म) = हे प्रभो! आप ‘अनन्त बल' हो । शत्रुओं का शोषण करनेवाला बल ‘शुष्म' है। वे अनन्त शुष्मवाले प्रभु स्मरण किये जाने पर मेरे कामादि शत्रुओं का भी तो शोषण कर देते हैं । २. (तुविक्रतो) = आप महान् प्रज्ञान, संकल्प व कर्मवाले हैं। मैं आपको अपना रथ बनाता हूँ, तो इन प्रज्ञान, कर्म व संकल्पों के अंश का अपने में दोहन करनेवाला बनता हूँ । ३. (शचीव:) = वेदवाणीवाले! आपको अपनाते ही मुझे भी यह वेदवाणी प्राप्त होने लगती है। ४. विश्वया मते-आप सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड को प्राप्त करनेवाली बुद्धिवाले हो । आपका आराधक भी अपनी मति का आधार सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड को बनाता है। वह अपने निश्चय विश्वहित के दृष्टिकोण से करता है ।५. (महित्वना आपप्राथ) = हे प्रभो ! आप अपनी महिमा से सर्वत्र फैले हुए हो। आपको अपना रथ बनाने पर मैं भी महान् बनने का प्रयत्न करता हूँ। इस महत्त्व ने ही तो मेरे मन के सारे मैल को धोना है। उदारता व विशालता ही मेरे हृदय को पवित्र करेगी। पवित्र जीवनवाला मैं सचमुच 'प्रिय-मेध' होऊँगा । अपवित्रता में ही ज्ञानातिरिक्त वस्तुएँ प्रिय हुआ करती हैं ।
Essence
मेरा प्रभुस्तवन इन शब्दों में हो – हे प्रभो! आप अनन्तबल हो, महान् प्रज्ञान, कर्म व संकल्पवाले हो । आप वेदवाणी के पति हो, व्यापक मतिवाले हो और अपनी महिमा से सर्वत्र व्याप्त हो । यह प्रभु-स्तवन मेरे जीवन को भी एक प्रबल प्रेरणा प्राप्त कराए ।
Subject
प्रियमेध का प्रभु-स्तवन