Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

Samveda Mantra 1746

1875 Mantra
Devata- अग्निः Rishi- बुधगविष्ठिरावात्रेयौ Chhand- त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
अ꣡बो꣢ध्य꣣ग्निः꣢ स꣣मि꣢धा꣣ ज꣡ना꣢नां꣣ प्र꣡ति꣢ धे꣣नु꣡मि꣢वाय꣣ती꣢मु꣣षा꣡स꣢म् । य꣣ह्वा꣡ इ꣢व꣣ प्र꣢ व꣣या꣢मु꣣ज्जि꣡हा꣢नाः꣣ प्र꣢ भा꣣न꣡वः꣢ सस्रते꣣ ना꣢क꣣म꣡च्छ꣢ ॥१७४६॥

अ꣡बो꣢꣯धि । अ꣣ग्निः꣢ । स꣣मि꣡धा꣢ । स꣣म् । इ꣡धा꣢꣯ । ज꣡ना꣢꣯नाम् । प्र꣡ति꣢꣯ । धे꣣नु꣢म् । इ꣣व । आयती꣢म् । आ꣣ । यती꣢म् । उ꣣षा꣡स꣢म् । य꣣ह्वा꣢ । इ꣣व । प्र꣢ । व꣣या꣢म् । उ꣣ज्जि꣡हा꣢नाः । उ꣣त् । जि꣡हा꣢꣯नाः । प्र । भा꣣न꣡वः꣢ । स꣣स्रते । ना꣡क꣢꣯म् । अ꣡च्छ꣢꣯ ॥१७४६॥

Mantra without Swara
अबोध्यग्निः समिधा जनानां प्रति धेनुमिवायतीमुषासम् । यह्वा इव प्र वयामुज्जिहानाः प्र भानवः सस्रते नाकमच्छ ॥

अबोधि । अग्निः । समिधा । सम् । इधा । जनानाम् । प्रति । धेनुम् । इव । आयतीम् । आ । यतीम् । उषासम् । यह्वा । इव । प्र । वयाम् । उज्जिहानाः । उत् । जिहानाः । प्र । भानवः । सस्रते । नाकम् । अच्छ ॥१७४६॥

Samveda - Mantra Number : 1746
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 8; Ardh Prapathak » 3;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 19; Khand » 4;

Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar) - हिन्दी
Meaning
प्रस्तुत मन्त्र की व्याख्या ७३ संख्या पर दी गयी है । सरलार्थ यह है-

१. (समिधा) = पृथिवी, अन्तरिक्ष तथा धुलोकरूप समिधाओं के द्वारा – इन पदार्थों के ज्ञान के द्वारा – आचार्यरूप अग्नि से (अग्नि:) = विद्यार्थिरूप अग्नि (अबोधि) = प्रज्वलित की जाती है [ अग्निना अग्निः समिध्यते], अर्थात् त्रिलोकी के पदार्थों का ज्ञान प्राप्त करके एक ब्रह्मचारी अग्नि के समान प्रकाशमय होता है ।

२. अब द्वितीयाश्रम में यह (प्रति आयतीम् उषासम्) = प्रत्येक आनेवाली उषा में (जनानां धेनुमिव) = मनुष्यों के लिए धेनु के समान होता है। धेनु जैसे दूध से, ये गृहस्थ उसी प्रकार दान से प्रजा का पालन करता है ।

३. अब गृहस्थ के पश्चात् (यह्वाः इव) = जैसे पक्षी बड़ा होकर (वयाम्) = शाखा को (प्र उज्जिहानाः) = छोड़ने की इच्छावाले होते हैं, उसी प्रकार यह भी अब गृह को छोड़कर वनस्थ होने का संकल्प करता है ।

४. वन में साधना के द्वारा (भानवः) = दीप्त बनकर - सूर्य के समान चमकता हुआ यह संन्यासी (नाकम् अच्छ) = मोक्ष की ओर प्रसस्त्रते बढ़ चलता है । 
Essence
 मेरी जीवन-यात्रा क्रमशः आगे और आगे बढ़ते हुए पूर्ण हो ।
Subject
यात्रा- क्रम