Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

Samveda Mantra 1745

1875 Mantra
Devata- अश्विनौ Rishi- अवस्युरात्रेयः Chhand- पङ्क्तिः Swara- पञ्चमः
Mantra with Swara
आ꣢ नो꣣ र꣡त्ना꣢नि꣣ बि꣡भ्र꣢ता꣣व꣡श्वि꣢ना꣣ ग꣡च्छ꣢तं यु꣣व꣢म् । रु꣢द्रा꣣ हि꣡र꣢ण्यवर्तनी जुषा꣣णा꣡ वा꣢जिनीवसू꣣ मा꣢ध्वी꣣ म꣡म꣢ श्रुत꣣ꣳ ह꣡व꣢म् ॥१७४५॥

आ꣢ । नः꣣ । र꣡त्ना꣢꣯नि । बि꣡भ्र꣢꣯तौ । अ꣡श्वि꣢꣯ना । ग꣡च्छ꣢꣯तम् । यु꣣व꣢म् । रु꣡द्रा꣢꣯ । हि꣡र꣢꣯ण्यवर्तनी । हि꣡र꣢꣯ण्य । व꣣र्तनीइ꣡ति꣢ । जु꣣षाणा꣢ । वा꣣जिनीवसू । वाजिनी । वसूइ꣡ति꣢ । माध्वी꣢꣯इ꣡ति꣢ । म꣡म꣢꣯ । श्रु꣣तम् । ह꣡व꣢꣯म् ॥१७४५॥

Mantra without Swara
आ नो रत्नानि बिभ्रतावश्विना गच्छतं युवम् । रुद्रा हिरण्यवर्तनी जुषाणा वाजिनीवसू माध्वी मम श्रुतꣳ हवम् ॥

आ । नः । रत्नानि । बिभ्रतौ । अश्विना । गच्छतम् । युवम् । रुद्रा । हिरण्यवर्तनी । हिरण्य । वर्तनीइति । जुषाणा । वाजिनीवसू । वाजिनी । वसूइति । माध्वीइति । मम । श्रुतम् । हवम् ॥१७४५॥

Samveda - Mantra Number : 1745
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 8; Ardh Prapathak » 3;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 19; Khand » 3;

Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar) - हिन्दी
Meaning
१. हे (अश्विाना) = प्राणापानो ! (रत्नानि बिभ्रतौ) = रमणीय स्वास्थ्य, नैर्मल्य व ज्ञान आदि — धनों को प्राप्त कराते हुए (नः) = हमारे प्रति (युवम्) = आप दोनों (आगच्छतम्) = आओ । (‘प्राणापाना इह मे रमन्ताम्') = प्राण और अपान जब शरीर में रमण करते हैं तब शरीर रमणीय रत्नों की खान बनता है। रत्नों के द्वारा ये प्राणापान इस शरीर-रथ को अलंकृत कर डालते हैं। २. (रुद्रा) = ये प्राणापान रुद्र हैं— रोग व द्वेषादिरूप शत्रुओं के लिए भयंकर हैं । स्वास्थ्य व नैर्मल्य के साधक हैं।

३. (हिरण्यवर्तनी) = जीवन के मार्ग को ज्योतिर्मय बनानेवाले हैं।

४. (जुषाणा) = प्रीतिपूर्वक प्रभु का सेवन करनेवाले हैं। [जुष्=प्रीतिसेवनयोः] । प्राण-साधना से चित्तवृत्ति एकाग्र होती है और मन प्रभु में केन्द्रित होकर अवर्णनीय आनन्द का अनुभव करता है| 

५. (वाजिनीवसू) = शक्तिरूप धन को प्राप्त करानेवाले ये प्राणापान (माध्वी) = अत्यन्त मधुर हैं । प्राणसाधना से शक्ति की अत्यधिक वृद्धि होती हैं । हे प्राणापानो ! (मम हवं श्रुतम्) = मेरी पुकार सुनो।
Essence
प्राणसाधना के द्वारा हम रमणीय धनों का लाभ करें।
Subject
रत्नों का लाभ