Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

Samveda Mantra 1701

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- निध्रुविः काश्यपः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
प꣡व꣢मानास आ꣣श꣡वः꣢ शु꣣भ्रा꣡ अ꣢सृग्र꣣मि꣡न्द꣢वः । घ्न꣢न्तो꣣ वि꣢श्वा꣣ अ꣢प꣣ द्वि꣡षः꣢ ॥१७०१॥

प꣡व꣢꣯मानासः । आ꣣श꣡वः꣢ । शु꣣भ्राः꣢ । अ꣣सृग्रम् । इ꣡न्द꣢꣯वः । घ्न꣡न्तः꣢꣯ । वि꣡श्वाः꣢꣯ । अ꣡प꣢꣯ । द्वि꣡षः꣢꣯ ॥१७०१॥

Mantra without Swara
पवमानास आशवः शुभ्रा असृग्रमिन्दवः । घ्नन्तो विश्वा अप द्विषः ॥

पवमानासः । आशवः । शुभ्राः । असृग्रम् । इन्दवः । घ्नन्तः । विश्वाः । अप । द्विषः ॥१७०१॥

Samveda - Mantra Number : 1701
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 8; Ardh Prapathak » 2;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 18; Khand » 4;

Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar) - हिन्दी
Meaning
(पवमानासः) = ये पवित्र करनेवाले सोम (असृग्रम्) = बनाये गये हैं—ये १. (आशवः) = मनुष्य को शीघ्रता से कार्य करनेवाला बनाते हैं, अर्थात् ये मनुष्य में स्फूर्ति बढ़ानेवाले हैं २. (शुभ्राः) = ये शरीर को नीरोग, मन को स्वस्थ तथा बुद्धि को तीव्र बनाकर शोभा की वृद्धि करनेवाले हैं । ३. (इन्दवः) = परमैश्वर्य को प्राप्त करानेवाले हैं तथा ४. (विश्वा:) = सब (द्विषः) = द्वेष की भावनाओं को (अपघ्नन्तः) = नष्ट करनेवाले हैं ।
Essence
सोम की रक्षा करनेवाला पुरुष १. आलस्यरहित, स्फूर्ति-सम्पन्न होता है । २. उत्तम गुणों से शोभावाला बनता है। ३. परमैश्वर्य का लाभ करता है और ४. अपने में द्वेष की अपवित्र भावनाओं को नहीं पनपने देता ।
Subject
द्वेष की भावना से दूर