Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

Samveda Mantra 1691

1875 Mantra
Devata- इन्द्रः Rishi- कलिः प्रागाथः Chhand- बार्हतः प्रगाथः (विषमा बृहती, समा सतोबृहती) Swara- मध्यमः
Mantra with Swara
व꣣य꣡मे꣢नमि꣣दा꣡ ह्योऽपी꣢꣯पेमे꣣ह꣢ व꣣ज्रि꣡ण꣢म् । त꣡स्मा꣢ उ अ꣣द्य꣡ सव꣢꣯ने सु꣣तं꣢ भ꣣रा꣢ नू꣣नं꣡ भू꣢षत श्रु꣣ते꣢ ॥१६९१॥

व꣣य꣢म् । ए꣣नम् । इदा꣢ । ह्यः । अ꣡पी꣢꣯पेम । इ꣣ह꣢ । व꣣ज्रि꣡ण꣢म् । त꣡स्मै꣢꣯ । उ꣣ । अद्य꣢ । अ꣣ । द्य꣢ । स꣡व꣢꣯ने । सु꣣त꣢म् । भ꣣र । आ꣢ । नू꣣न꣢म् । भू꣣षत । श्रुते꣢ ॥१६९१॥

Mantra without Swara
वयमेनमिदा ह्योऽपीपेमेह वज्रिणम् । तस्मा उ अद्य सवने सुतं भरा नूनं भूषत श्रुते ॥

वयम् । एनम् । इदा । ह्यः । अपीपेम । इह । वज्रिणम् । तस्मै । उ । अद्य । अ । द्य । सवने । सुतम् । भर । आ । नूनम् । भूषत । श्रुते ॥१६९१॥

Samveda - Mantra Number : 1691
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 8; Ardh Prapathak » 2;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 18; Khand » 3;

Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar) - हिन्दी
Meaning
२७२ संख्या पर इस मन्त्र का अर्थ इस प्रकार दिया गया है -  (वयम्) = हम (इत्) = निश्चय से (आ) = सब प्रकार से (ह्यः) = जैसे कल उसी प्रकार इह आज के दिन भी (एनम्) = इस प्रभु को (अपीपेम) = आप्यायित करते हैं । वे प्रभु (वज्रिणम्) = वज्रवाले हैं । (तस्मा) = उस प्रभु के लिए (उ) = ही (अद्य) = आज (सवने) = यज्ञों में (सुतम्) = आहुतियों को (भर) = प्राप्त कराता हूँ और उस प्रभु की प्राप्ति के लिए (नूनम्) = निश्चय से (श्रुते) = ज्ञान के क्षेत्र में भूषत-अपने को अलंकृत करता हूँ । 
Essence
प्रभु-प्राप्ति के लिए हम ‘यज्ञों' तथा 'ज्ञान' के मार्ग को अपनाएँ। 
Subject
प्रभु का अध्ययन