Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

Samveda Mantra 1635

1875 Mantra
Devata- अग्निः Rishi- शुनःशेप आजीगर्तिः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
स꣡ घा꣢ नः सू꣣नुः꣡ शव꣢꣯सा पृ꣣थु꣡प्र꣢गामा सु꣣शे꣡वः꣢ । मी꣣ढ्वा꣢ꣳ अ꣣स्मा꣡कं꣢ बभूयात् ॥१६३५॥

सः꣢ । घ꣣ । नः । सूनुः꣢ । श꣡व꣢꣯सा । पृ꣣थु꣡प्र꣢गामा । पृ꣣थु꣢ । प्र꣣गामा । सुशे꣡वः꣢ । सु꣣ । शे꣡वः꣢꣯ । मी꣣ढ्वा꣢न् । अ꣣स्मा꣡क꣢म् । ब꣣भूयात् ॥१६३५॥

Mantra without Swara
स घा नः सूनुः शवसा पृथुप्रगामा सुशेवः । मीढ्वाꣳ अस्माकं बभूयात् ॥

सः । घ । नः । सूनुः । शवसा । पृथुप्रगामा । पृथु । प्रगामा । सुशेवः । सु । शेवः । मीढ्वान् । अस्माकम् । बभूयात् ॥१६३५॥

Samveda - Mantra Number : 1635
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 8; Ardh Prapathak » 1;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 17; Khand » 2;

Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar) - हिन्दी
Meaning
(सः) = वह प्रभु (घ) = निश्चय से (अस्माकम्) = हमारा (बभूयात्) = हो । कौन-सा प्रभु ? जो— १. (नः सूनुः) = हमें प्रेरणा देनेवाला है [षू प्रेरणे] । पुत्र भी सूनु कहलाता है, क्योंकि वह हमें कमाने इत्यादि की प्रेरणा देता है । सन्तानों के लिए ही तो मनुष्य कमाता है । प्रभु इस दृष्टिकोण से भी सूनु हैं कि भक्त उन्हें अपने हृदय में जन्म देने का प्रयत्न करता है । २. (शवसा पृथुप्रगामा) = गतिमय शक्ति [Dynamic energy=शवस्] के द्वारा वह प्रभु हमें विशाल क्रिया-क्षेत्र में चलानेवाला है ।

३. (सुशेवः प:) = वह उत्तम सुखों को प्राप्त करानेवाला है।

४. (मीढ्द्वान्) = अङ्ग-प्रत्यङ्ग में शक्ति का सेचन करनेवाला है। [मिह् सेचने]

यदि हम प्रभु से अपना सम्पर्क जोड़ेंगे तो सदा उसकी उत्तम प्रेरणा को सुनेंगे, प्रबल क्रियाशक्तिवाले होंगे, सुखमय जीवन का लाभ करेंगे तथा हमारा अङ्ग-प्रत्यङ्ग शक्तिसम्पन्न होगा । इस प्रकार का जीवन बनाकर हम सचमुच इस मन्त्र के ऋषि 'शुन: शेप' होंगे - अपने जीवनों में सुखों का निर्माण करनेवाले होंगे ।
Essence
हमारा एकमात्र आधार प्रभु ही हो । हम तन्मय हो जाएँ ।
Subject
वह प्रभु ही हमारा हो