Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

Samveda Mantra 1634

1875 Mantra
Devata- अग्निः Rishi- शुनःशेप आजीगर्तिः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
अ꣢श्वं꣣ न꣢ त्वा꣣ वा꣡र꣢वन्तं व꣣न्द꣡ध्या꣢ अ꣣ग्निं꣡ नमो꣢꣯भिः । स꣣म्रा꣡ज꣢न्तमध्व꣣रा꣡णा꣢म् ॥१६३४॥

अ꣡श्व꣢꣯म् । न । त्वा꣣ । वा꣡र꣢꣯वन्तम् । व꣣न्द꣡ध्यै꣢ । अ꣣ग्नि꣢म् । न꣡मो꣢꣯भिः । स꣣म्रा꣡ज꣢न्तम् । स꣣म् । रा꣡ज꣢꣯न्तम् । अ꣣ध्वरा꣡णा꣢म् ॥१६३४॥

Mantra without Swara
अश्वं न त्वा वारवन्तं वन्दध्या अग्निं नमोभिः । सम्राजन्तमध्वराणाम् ॥

अश्वम् । न । त्वा । वारवन्तम् । वन्दध्यै । अग्निम् । नमोभिः । सम्राजन्तम् । सम् । राजन्तम् । अध्वराणाम् ॥१६३४॥

Samveda - Mantra Number : 1634
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 8; Ardh Prapathak » 1;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 17; Khand » 2;

Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar) - हिन्दी
Meaning
इस मन्त्र की व्याख्या संख्या १७ पर हुई है। सरलार्थ इस प्रकार है (अध्वराणाम्) = सब हिंसारहित यज्ञात्मक कर्मों के (सम्राजम्) = सम्राट् (तम्) = उस (अग्निम्) = सबके अग्रेणी (वारवन्तम्) = प्रशस्तरूप से शत्रुओं के निवारणरूप कार्य को करनेवाले (अश्वं न) = जीवनयात्रा के लिए घोड़े के समान (त्वा) = आपका (नमोभिः) = नमस्कारों से, नम्रता से (वन्दध्या) = हम वन्दन करते हैं। 
Essence
प्रभु-वन्दना के द्वारा हम अपने जीवनों को सुखमय बनाएँ ।
 
Subject
प्रभु ही हमारी जीवन-यात्रा पूरी करेंगे