Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

Samveda Mantra 163

1875 Mantra
Devata- इन्द्रः Rishi- शुनः शेप आजीगर्तिः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः Kaand Name- ऐन्द्रं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- ऐन्द्रं पर्व
Mantra with Swara
यो꣡गे꣢योगे त꣣व꣡स्त꣢रं꣣ वा꣡जे꣢वाजे हवामहे । स꣡खा꣢य꣣ इ꣡न्द्र꣢मू꣣त꣡ये꣢ ॥१६३॥

यो꣡गे꣢꣯योगे । यो꣡गे꣢꣯ । यो꣣गे । तव꣡स्त꣢रम् । वा꣡जे꣢꣯वाजे । वा꣡जे꣢꣯ । वा꣣जे । हवामहे । स꣡खा꣢꣯यः । स । खा꣣यः । इ꣡न्द्र꣢म् । ऊ꣣त꣡ये꣢ ॥१६३॥

Mantra without Swara
योगेयोगे तवस्तरं वाजेवाजे हवामहे । सखाय इन्द्रमूतये ॥

योगेयोगे । योगे । योगे । तवस्तरम् । वाजेवाजे । वाजे । वाजे । हवामहे । सखायः । स । खायः । इन्द्रम् । ऊतये ॥१६३॥

Samveda - Mantra Number : 163
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 2; Ardh Prapathak » 2; Dashati » 2;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 2; Khand » 5;

Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar) - हिन्दी
Meaning
जिस व्यक्ति के जीवन का उद्देश्य बहुत ऊँचा आध्यात्मिक उत्थान नहीं है, अपितु जो सामान्यतः शुनः=सुख के शेप- निर्माण में ही लगा है और परिणामतः समय-समय पर गर्त की ओर अज=गतिवाला होता है, यह शुन:शेप आजीगर्ति भी अपने अनुभवों से अपने मार्ग को ग़लत समझकर कहता है कि- (सखायः) = हे मित्रो! (इन्द्रम्) = उस शत्रुओं को दूर भगानेवाले प्रभु को ही (हवामहे) = पुकारते हैं जोकि (योगेयोगे तवस्तरम्) = जब-जब उसके साथ सम्पर्क होता है उस-उस समय पर शक्ति को बढ़ानेवाला है [ तव : - बल, तृ-बढ़ाना ]। चाहे कोई व्यक्ति कितने भी अपवित्र मार्ग पर जा रहा हो, उसे अपने जीवन में, दु:ख के समय ही सही, प्रभु का ध्यान आने पर शक्ति प्राप्ति होती प्रतीत होती है। इस समय वह कल्पना तो कर ही सकता है कि सदा प्रभु के सम्पर्क में रहने पर वह कितना शक्तिशाली हो जाएगा।

भोगमार्ग पर चलनेवाला बार-बार असफल होने पर अन्त में प्रभु से कहता है कि (वाजेवाजे) = प्रत्येक संग्राम में - वासनाओं के साथ होनेवाले संघर्ष में हम प्रभु को ही पुकारते हैं। आप प्रभु ही इन वासनाओं का विनाश करेंगे और (ऊतये) = हमारी रक्षा के लिए होंगे। ‘वासना-विजय का मुख्य साधन प्रभु-स्मरण ही है' यह बात तो मन्त्र से स्पष्ट ही है, साथ ही ‘सखायः' शब्द यह भी संकेत कर रहा है कि वासना के विजिगीषुओं को चाहिए कि वे सखा बनें-ज्ञानमूलक मैत्री बढ़ाएँ [सखा - समान ख्यानवाले], परस्पर मिलकर ज्ञान की चर्चा करें। ‘प्रभु - स्मरण और ज्ञान का वातावरण' ये दोनों बातें मिलकर वासनाओं को विनष्ट कर देंगी।
Essence
जब हमपर वासनाओं का आक्रमण हो तो हम प्रभु-स्मरण करें। यह प्रभु - स्मरण वासनाओं को विनष्ट कर देगा।
Subject
शुनः शेप आजीगर्ति [ वासना - विनाश ]