Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

Samveda Mantra 1629

1875 Mantra
Devata- इन्द्रवायू Rishi- वामदेवो गौतमः Chhand- अनुष्टुप् Swara- गान्धारः
Mantra with Swara
इ꣡न्द्र꣢श्च वायवेषा꣣ꣳ सो꣡मा꣢नां पी꣣ति꣡म꣢र्हथः । यु꣣वा꣡ꣳ हि यन्तीन्द꣢꣯वो नि꣣म्न꣢꣫मापो꣣ न꣢ स꣣꣬ध्र्य꣢꣯क् ॥१६२९॥

इ꣡न्द्रः꣢꣯ । च꣣ । वा꣡यो꣢꣯ । एषाम् । सो꣡मा꣢꣯नाम् । पी꣣ति꣢म् । अ꣣र्हथः । युवा꣢म् । हि । य꣡न्ति꣢꣯ । इ꣡न्द꣢꣯वः । नि꣣म्न꣢म् । आ꣡पः꣢꣯ । न । स꣣꣬ध्र्य꣢क् । स꣣ । ध्र्य꣣꣬क् ॥१६२९॥

Mantra without Swara
इन्द्रश्च वायवेषाꣳ सोमानां पीतिमर्हथः । युवाꣳ हि यन्तीन्दवो निम्नमापो न सध्र्यक् ॥

इन्द्रः । च । वायो । एषाम् । सोमानाम् । पीतिम् । अर्हथः । युवाम् । हि । यन्ति । इन्दवः । निम्नम् । आपः । न । सध्र्यक् । स । ध्र्यक् ॥१६२९॥

Samveda - Mantra Number : 1629
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 8; Ardh Prapathak » 1;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 17; Khand » 2;

Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar) - हिन्दी
Meaning
हे (वायो) = प्राण ! तू (च) = और (इन्द्रः) = इन्द्रियों का अधिष्ठाता जीव, जिसे पिछले मन्त्र में ‘नियुत्वान्' उत्तम इन्द्रियरूप अश्वोंवाला कहकर स्मरण किया था, तुम दोनों एषां (सोमानाम्) = इन सोमों के (पीतिम् अर्हथ:) = पान के योग्य हो । प्राणसाधना के बिना वीर्य व रेतस् की ऊर्ध्वगति नहीं होती और इन्द्रियों का अधिष्ठाता जीव [इन्द्र] ही प्राणसाधना करनेवाला होता है । एवं, इन्द्र और वायु मिलकर सोमपान करते हैं ।

(युवां हि) = निश्चय से तुम दोनों को ही (इन्दवः) = ये सोमकण यन्ति प्राप्त होते हैं (न) = उसी प्रकार स्वाभाविकरूप से जैसे (आपः) = जल (निम्नम् सध्यक्) = निम्न स्थान [slope] की ओर जानेवाले होते हैं। जैसे पानी सहजतया ढलान की ओर जाते हैं उसी प्रकार ये सोमकण इन्द्र और वायु की ओर स्वाभाविकरूप से जाते हैं । इस समय इनकी ऊर्ध्वगति उतनी ही स्वाभाविक हो जाती है जितनी कि पानी की निम्नगति स्वाभाविक है ।

एवं, स्पष्ट है कि जीवात्मा 'इन्द्र' बने – इन्द्रियों का अधिष्ठाता बने और प्राणों की साधना करे। इस प्रकार जितेन्द्रियता व प्राणायाम द्वारा ही हम सोमरक्षा कर पाएँगे और यह सोमरक्षा ही हमारे जीवन-उत्थान का कारण बनेगी ।
Essence
मैं प्राणायाम द्वारा वीर्य की ऊर्ध्वगति करके सोमपान करनेवाला 'इन्द्र' बनूँ ।
Subject
इन्द्र और वायु का सोमपान