Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

Samveda Mantra 1600

1875 Mantra
Devata- इन्द्रः Rishi- शुनःशेप आजीगर्तिः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
स्तो꣣त्र꣡ꣳ रा꣢धानां पते꣣ गि꣡र्वा꣢हो वीर꣣ य꣡स्य꣢ ते । वि꣡भू꣢तिरस्तु सू꣣नृ꣡ता꣢ ॥१६००॥

स्तो꣣त्र꣢म् । रा꣣धानाम् । पते । गि꣡र्वा꣢꣯हः । वी꣣र । य꣡स्य꣢꣯ । ते꣣ । वि꣡भू꣢꣯तिः । वि । भू꣣तिः । अस्तु । सूनृ꣡ता꣢ । सू꣣ । नृ꣡ता꣢꣯ ॥१६००॥

Mantra without Swara
स्तोत्रꣳ राधानां पते गिर्वाहो वीर यस्य ते । विभूतिरस्तु सूनृता ॥

स्तोत्रम् । राधानाम् । पते । गिर्वाहः । वीर । यस्य । ते । विभूतिः । वि । भूतिः । अस्तु । सूनृता । सू । नृता ॥१६००॥

Samveda - Mantra Number : 1600
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 7; Ardh Prapathak » 3;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 16; Khand » 3;

Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar) - हिन्दी
Meaning
गत मन्त्र में शुन: शेप ने ज्ञान के वचनों को प्राप्त कराने के लिए प्रार्थना की थी । उस प्रार्थना को स्वीकार करते हुए प्रभु शुनः शेप से कहते हैं - हे (वीर) = कामादि शत्रुओं को कम्पित करके दूर करनेवाले ! (राधानां पते) = सफलताओं के पति शुन: शेप ! (गिरवाहः) = वेदवाणियों को धारण करनेवाले (यस्य ते) = जिस तेरा (स्तोत्रम्) = यह स्तुतिवचन है, अर्थात् जो तू प्रभु की स्तुति करने में प्रवृत्त है, उस तेरी (विभूतिः) = समृद्धि (सूनृता अस्तु) = प्रिय व सत्य हो ।

प्रभु का स्तोता बनने के लिए आवश्यक है कि हम १. वीर हों – कामादि शत्रुओं को दूर भगानेवालो हों। २. कर्मों को इस प्रकार कुशलता व समझदारी से करें कि हमें सफलता-हीसफलता मिले। ३. वेदवाणियों को धारण करनेवाले बनें तथा ४. हमारी समृद्धि प्रिय व सत्य हो - अर्थात् हम क्रूरता व अन्याय से धन जुटानेवाले न हों।

सच्चे स्तोता बनने के लिए आवश्यक ये चार बातें ही हमारे जीवन को सचमुच सुखी करेंगी और हम सच्चे अर्थों में 'शुन: शेप' बन पाएँगे ।
Essence
मैं वीर, राधानां पति, गिर्वाह तथा सूनृत विभूतिवाला बनूँ ।
Subject
सूनृत विभूति