Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

Samveda Mantra 1594

1875 Mantra
Devata- मरुतः Rishi- गोतमो राहूगणः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
श꣣शमान꣡स्य꣢ वा नरः꣣ स्वे꣡द꣢स्य सत्यशवसः । वि꣣दा꣡ काम꣢꣯स्य꣣ वे꣡न꣢तः ॥१५९४॥

श꣣शमान꣡स्य꣢ । वा꣣ । नरः । स्वे꣡द꣢꣯स्य । स꣣त्यशवसः । सत्य । शवसः । विद꣢ । का꣡म꣢꣯स्य । वे꣡न꣢꣯तः ॥१५९४॥

Mantra without Swara
शशमानस्य वा नरः स्वेदस्य सत्यशवसः । विदा कामस्य वेनतः ॥

शशमानस्य । वा । नरः । स्वेदस्य । सत्यशवसः । सत्य । शवसः । विद । कामस्य । वेनतः ॥१५९४॥

Samveda - Mantra Number : 1594
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 7; Ardh Prapathak » 3;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 16; Khand » 3;

Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar) - हिन्दी
Meaning
अपनी इन्द्रियों को उत्तम बनानेवाले मनुष्य 'गो-तम'=प्रशस्तेन्द्रिय कहलाते हैं । ये ही अपने जीवन में आगे बढ़ने के कारण 'नर:' हैं [नृ नये ] | इन नर व्यक्तियों से प्रभु कहते हैं -

(नरः) = हे मनुष्यो ! (कामस्य विद) = तुम काम- इच्छा को प्राप्त करो, परन्तु किस पुरुष की इच्छा को ? १. (शशमानस्य) = प्लुत गतिवाले मनुष्य की इच्छा को । उस मनुष्य की कामना को जो पुरुषार्थ में किसी प्रकार की कमी नहीं करता । २. (स्वेदस्य) = जो परिश्रम करके पसीने से तर-बतर हो जाता है—‘न ऋते श्रान्तस्य सख्याय देवाः '-देवता इस परिश्रम से चूर-चूर हुए-हुए पुरुष की ही मित्रता के लिए होते हैं । ३. (सत्यशवस:) = सत्य के बलवाले की । तुम कभी भी उस पुरुष की कामना को प्राप्त मत करो जो असत्य से कमाने का प्रयत्न करता है । ४. (वा) = तथा (वेनतः) = मेधावी तथा यज्ञशील की । मूर्ख मनुष्य की कामना तो अनुपादेय है ही, परन्तु साथ ही स्वार्थ में रत पुरुष की कामना भी हमारी न हो । कामना तभी ठीक है यदि यह निम्न बातों से समवेत हो

१. क्रियाशीलता, २. श्रम, ३. सत्य तथा ४. बुद्धिमत्ता और लोकहित की भावना । इन बातों से युक्त ‘काम’ धर्माविरुद्ध है - यह हममें प्रभु का रूप है । यही काम पवित्र है। यही हमें सदा लोकहित के व्यापक कर्मों में प्रवृत्त रखता है और हमारी इन्द्रियाँ पवित्र बनी रहती हैं ।
Essence
हममें काम हो, परन्तु वह धर्माविरुद्ध हो । उसके साथ पुरुषार्थ, श्रम, सत्य, बुद्धिमत्ता तथा यज्ञिय भावना जुड़ी हुई हों ।
Subject
धर्माविरुद्ध काम