Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

Samveda Mantra 1586

1875 Mantra
Devata- इन्द्रः Rishi- सुकक्ष आङ्गिरसः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
क꣢या꣣ त्वं꣡ न꣢ ऊ꣣त्या꣡भि प्र म꣢꣯न्दसे वृषन् । क꣡या꣢ स्तो꣣तृ꣢भ्य꣣ आ꣡ भ꣢र ॥१५८६॥

क꣡या꣢꣯ । त्वम् । नः꣣ । ऊत्या꣢ । अ꣡भि꣢ । प्र । म꣣न्दसे । वृषन् । क꣡या꣢꣯ । स्तो꣣तृ꣡भ्यः꣢ । आ । भ꣣र ॥१५८६॥

Mantra without Swara
कया त्वं न ऊत्याभि प्र मन्दसे वृषन् । कया स्तोतृभ्य आ भर ॥

कया । त्वम् । नः । ऊत्या । अभि । प्र । मन्दसे । वृषन् । कया । स्तोतृभ्यः । आ । भर ॥१५८६॥

Samveda - Mantra Number : 1586
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 7; Ardh Prapathak » 3;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 16; Khand » 2;

Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar) - हिन्दी
Meaning
(वृषन्) = हे सब सुखों की वर्षा करनेवाले प्रभो ! (त्वम्) = आप (नः) = हमें (कया ऊत्या) = अनिर्वचनीय [Indescribable] या अत्यन्त आनन्दमय रक्षण के द्वारा (अभिप्रमन्दसे) = इहलोक व परलोक में आनन्दित करते हो । प्रभु की रक्षा से सुरक्षित होकर हम ऐहलौकिक व पारलौकिक हितसाधन कर पाते हैं। हे प्रभो! (कया) = अपने उसी आनन्दप्रद रक्षण से (स्तोतृभ्यः) = अपने स्तोताओं के लिए (आभर) = जीवन-यात्रा के लिए आवश्यक धन का भरण करो। आप अपने भक्तों के योगक्षेम को चलाते ही हो। हम भक्तों को भी आप उदर-भरण के लिए व्यग्र न कीजिए । इस चिन्ता से मुक्त रहकर हम सदा आपके निर्देशों के अनुसार अपने जीवन को चलाने के प्रयत्न में लगे रहें। आपकी शरण ही सर्वोत्तम शरण है उसमें रहते हुए हम इस मन्त्र के ऋषि 'सुकक्ष' बनें । 
Essence
हम सदा प्रभु के रक्षण में विश्वास रखनेवाले आस्तिक पुरुष बनें ।
Subject
अचिन्त्य-रक्षण