Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

Samveda Mantra 1551

1875 Mantra
Devata- अग्निः Rishi- उशना काव्यः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
अ꣡धा꣣ त्वं꣢꣫ हि न꣣स्क꣢रो꣣ वि꣡श्वा꣢ अ꣣स्म꣡भ्य꣢ꣳ सुक्षि꣣तीः꣢ । वा꣡ज꣢द्रविणसो꣣ गि꣡रः꣢ ॥१५५१॥

अ꣡ध꣢꣯ । त्वम् । हि । नः꣣ । क꣡रः꣢꣯ । वि꣡श्वाः꣢꣯ । अ꣣स्म꣡भ्य꣢म् । सु꣣क्षितीः꣢ । सु꣣ । क्षितीः꣢ । वा꣡ज꣢꣯द्रविणसः । वा꣡ज꣢꣯ । द्र꣣विणसः । गि꣡रः꣢꣯ ॥१५५१॥

Mantra without Swara
अधा त्वं हि नस्करो विश्वा अस्मभ्यꣳ सुक्षितीः । वाजद्रविणसो गिरः ॥

अध । त्वम् । हि । नः । करः । विश्वाः । अस्मभ्यम् । सुक्षितीः । सु । क्षितीः । वाजद्रविणसः । वाज । द्रविणसः । गिरः ॥१५५१॥

Samveda - Mantra Number : 1551
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 7; Ardh Prapathak » 2;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 15; Khand » 2;

Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar) - हिन्दी
Meaning
परमात्म-चिन्तन करता हुआ उशना अनुभव करता और कहता है कि हे प्रभो ! (अध) = अब (हि) = निश्चय से (त्वम्) = आप ही (न:) = हमें (विश्वाः) = सम्पूर्ण (सुक्षितीः) = उत्तम निवास स्थानों को (अस्मभ्यम्) = हमारे लिए (कर:) = प्राप्त कराते हो । हमारे कर्मों व योग्यताओं के अनुसार जैसा भी लोक हमारे लिए हितकर होता है कृपा करके प्रभु हमें उस उस उत्तम लोक में जन्म देते हैं। उन लोकों में जन्म देकर हे प्रभो! आप ही (वाजद्रविणस:) = ज्ञानरूप धन से परिपूर्ण (गिरः) = वेदवाणियों को (नः) = हमारे लिए (करः) = प्राप्त कराते हैं । एवं, प्रभु हमें उत्तम लोकों में जन्म देकर उत्तम ज्ञान प्राप्त करानेवाले हैं। प्राकृतिक साधनों का संकेत 'सुक्षिती: ' शब्द कर रहा है और अध्यात्म साधनों का उल्लेख ‘गिरः’ शब्द द्वारा हुआ है । इस प्रकार प्रभु ने हमारे भौतिक व अध्यात्म दोनों उन्नतियों की सुव्यवस्था कर दी है। उत्तम निवास-भूमियाँ हमारी सब भौतिक आवश्यकताओं को पूर्ण करने के लिए समुचित साधन उपस्थित कर देती हैं और ये वेदवाणियाँ हमारी आध्यात्मिक उन्नति का समुचित मार्ग हमें प्रदर्शित कर रही हैं। हम इन भूमियों से प्राप्त कराये गये पदार्थों का ठीक प्रयोग करते हुए और वेदवाणियों द्वारा अपने ज्ञान को बढ़ाते हुए ऐहिक व आमुष्मिक उन्नति करने में समर्थ होते हैं|
Essence
हे प्रभो! आप ही उत्तम लोकों व उत्तम ज्ञानों को देनेवाले हैं।
Subject
उशाना का स्तवन