Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

Samveda Mantra 1534

1875 Mantra
Devata- अग्निः Rishi- विरूप आङ्गिरसः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
उ꣡द꣢ग्ने꣣ शु꣡च꣢य꣣स्त꣡व꣢ शु꣣क्रा꣡ भ्राज꣢꣯न्त ईरते । त꣢व꣣ ज्यो꣡ती꣢ꣳष्य꣣र्च꣡यः꣢ ॥१५३४॥

उत् । अ꣣ग्ने । शु꣡च꣢꣯यः । त꣡व꣢꣯ । शु꣣क्राः꣢ । भ्रा꣡ज꣢꣯न्तः । ई꣣रते । त꣡व꣢꣯ । ज्यो꣡ती꣢꣯ꣳषि । अ꣣र्च꣡यः꣢ ॥१५३४॥

Mantra without Swara
उदग्ने शुचयस्तव शुक्रा भ्राजन्त ईरते । तव ज्योतीꣳष्यर्चयः ॥

उत् । अग्ने । शुचयः । तव । शुक्राः । भ्राजन्तः । ईरते । तव । ज्योतीꣳषि । अर्चयः ॥१५३४॥

Samveda - Mantra Number : 1534
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 7; Ardh Prapathak » 1;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 14; Khand » 4;

Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar) - हिन्दी
Meaning
अपने स्तोता ‘विरूप' से प्रभु कहते हैं कि – हे (अग्ने) = उन्नतिशील, उन्नति-पथ पर निरन्तर आगे बढ़नेवाले विरूप १. (तव) = तेरे (शुचयः) = पवित्र व उज्वल (भ्राजन्तः) = चमकते हुए - तेरे जीवन को दीप्त बनाते हुए (शुक्रा:) = वीर्यकण-शक्ति के बिन्दु (उद् ईरते) = सदा ऊर्ध्वगतिवाले होते हैं और शरीर के अङ्ग-प्रत्यङ्ग में व्याप्त होकर रोग-कृमियों को कम्पित कर तेरे शरीर को नीरोग बनाते हैं। रोगकृमियों को उत्=बाहर [out] निकाल भगाते हैं, तभी तू विरूप बना है – तेरा चेहरा स्वास्थ्य की दीप्ति से चमक रहा है ।

२. ये ही वीर्यकण मस्तिष्क में पहुँचकर ज्ञानाग्नि को समिद्ध करते हैं और (तव ज्योतींषि) = तेरी ज्ञान की ज्योतियाँ (भ्राजन्त:) = चमकती हुई होती हैं ।

३. (तव) = तेरी (अर्चयः) = उपासना की [अर्च पूजायाम्] वृत्तियाँ भी (उदीरते) = उन्नत होती हैं । तुझमें अधिकाधिक प्रभु-स्तवन की प्रवृत्ति होती है ।

एवं, इस मन्त्र में प्रभु ने उन्नति के तीन आवश्यक अङ्गों का संकेत किया है । १. प्रथम तो पवित्र व उज्ज्वल सोम=वीर्यकणों की ऊर्ध्वगति । यह इन्द्र का सोमपान है— इसके बिना 'इन्द्र' इन्द्र नहीं बन सकता। २. ज्ञान की ज्योति का दीप्त होना तथा ३. उपासना की वृत्ति का प्रबल होना।
Essence
हम उन्नति के तत्त्वों को समझकर उन्नति के मार्ग को अपनाएँ। हम सोमपान करें, अर्थात् संयमी जीवनवाले बनें, ज्ञान की ज्योति को जगाएँ, अर्चनामय जीवन बनाएँ ।
Subject
उन्नति के तीन तत्त्व