Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

Samveda Mantra 1519

1875 Mantra
Devata- अग्निः पवमानः Rishi- शतं वैखानसाः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
अ꣣ग्नि꣢꣫रृषिः꣣ प꣡व꣢मानः꣣ पा꣡ञ्च꣢जन्यः पुरोहितः । त꣡मी꣢महे महाग꣣य꣢म् ॥१५१९॥

अ꣣ग्निः꣢ । ऋ꣡षिः꣢꣯ । प꣡व꣢꣯मानः । पा꣡ञ्च꣢꣯जन्यः । पा꣡ञ्च꣢꣯ । ज꣣न्यः । पुरो꣡हि꣢तः । पु꣣रः꣢ । हि꣣तः । त꣢म् । ई꣣महे । महागय꣢म् । म꣣हा । गय꣢म् ॥१५१९॥

Mantra without Swara
अग्निरृषिः पवमानः पाञ्चजन्यः पुरोहितः । तमीमहे महागयम् ॥

अग्निः । ऋषिः । पवमानः । पाञ्चजन्यः । पाञ्च । जन्यः । पुरोहितः । पुरः । हितः । तम् । ईमहे । महागयम् । महा । गयम् ॥१५१९॥

Samveda - Mantra Number : 1519
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 7; Ardh Prapathak » 1;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 14; Khand » 3;

Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar) - हिन्दी
Meaning
१. (अग्निः) = वे प्रभु अग्नि हैं, अग्रेणी हैं, हमें उन्नति-पथ पर ले-चल रहे हैं। २. (ऋषिः) = वे तत्त्वद्रष्टा हैं या सर्वत्र प्राप्त [ऋष गतौ] सर्वव्यापक हैं । वस्तुतः सर्वव्यापकता से ही सर्वतत्त्वद्रष्टा व सर्वज्ञ हैं ।
३. (पवमानः) = हृदयस्थरूपेण सदा सुन्दर प्रेरणा देते हुए हमारे जीवनों को पवित्र बना रहे हैं । ४. (पाञ्चजन्यः) = पाँच ज्ञानेन्द्रिय, पञ्चकर्मेन्द्रिय व पञ्चप्राणयुक्त जनों का अथवा ब्राह्मण, क्षत्रिय, इन पाँच भागों में विभक्त जनों का हित करनेवाले हैं वैश्य, शूद्र तथा निषाद - ।

५. (पुरोहितः) = वे बनने से पहले निहित= रक्खे हुए हैं, अर्थात् वे कभी बने नहीं, वे तो सदा से हैं, अथवा [पुर:हितं दधाति] सबसे पहले जीवहित को धारण करनेवाले हैं।

६. (तम्) = उन (महागयम्) = [नि० २.१० धन] महाधन [नि० ३.४ गृह] सबके निवास स्थान होने से महान् गृह अथवा [प्राणा वै गया: श० १४.८.१५.७] महाप्राण प्रभु को (ईमहे) = हम चाहते हैं [ई=to desire], उसे प्राप्त करने के लिए प्रयत्न करते हैं [ई-to go ] उस प्रभु की भावना से अपने को गर्भित कर लेते हैं [ ई = to become pregnant with]।

इस प्रकार प्रभु के ध्यान से शतशः वासनाओं को उखाड़ डालनेवाला यह व्यक्ति 'वैखानस' नामवाला होता है। वह प्रभु को ही अपना घर बनाता है। वहाँ उस महाप्राण प्रभु की गोद में वासनाओं ने इसपर क्या आक्रमण करना ?
Essence
हम महाप्राण प्रभु का ध्यान करें ।
Subject
'महागय' प्रभु का ध्यान