Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

Samveda Mantra 1518

1875 Mantra
Devata- अग्निः पवमानः Rishi- शतं वैखानसाः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
अ꣢ग्न꣣ आ꣡यू꣢ꣳषि पवस꣣ आसुवोर्जमिषं च नः । आरे बाधस्व दुच्छुनाम् ॥१५१८॥

अ꣡ग्ने꣢꣯ । आ꣡यू꣢꣯ꣳषि । प꣣वसे । आ꣢ । सु꣣व । ऊ꣡र्ज꣢꣯म् । इ꣡ष꣢꣯म् । च꣣ । नः । आरे꣢ । बाध꣣स्व । दु꣣च्छु꣡ना꣢म् ॥१५१८॥

Mantra without Swara
अग्न आयूꣳषि पवस आसुवोर्जमिषं च नः । आरे बाधस्व दुच्छुनाम् ॥

अग्ने । आयूꣳषि । पवसे । आ । सुव । ऊर्जम् । इषम् । च । नः । आरे । बाधस्व । दुच्छुनाम् ॥१५१८॥

Samveda - Mantra Number : 1518
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 7; Ardh Prapathak » 1;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 14; Khand » 3;

Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar) - हिन्दी
Meaning
६२७ संख्या पर इस मन्त्र का अर्थ इस प्रकार है

सैकड़ों बुराइयों को उखाड़कर फेंकनेवाला ‘शतं वैखानस' प्रभु से आराधना करता है— अग्ने सब बुराइयों को भस्म करके उन्नति को सिद्ध करनेवाले प्रभो! आप (न:) = हमारे (आयूँषि) = जीवनों को (पवसे) = पवित्र करते हो। आप (ऊर्जम्) = बल और प्राणशक्ति को (इषम्) = प्रेरणा को व प्रकृष्ट गति को (नः) = हमें (आसुव) = प्राप्त कराइए । आप कृपया (दुच्छुनाम्) = दुर्वृत्तियों [शुन् गतौ] को आरे दूर (वाधस्व) = रोक दीजिए - हमसे दूर भगा दीजिए ।
Essence
‘पवमान' प्रभु के ध्यान से हमारा जीवन पवित्र बने।
Subject
दुर्वृत्तियों का दूरीकरण