Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

Samveda Mantra 1509

1875 Mantra
Devata- इन्द्रः Rishi- विश्वमना वैयश्वः Chhand- उष्णिक् Swara- ऋषभः
Mantra with Swara
ए꣢न्दु꣣मि꣡न्द्रा꣢य सिञ्चत꣣ पि꣡बा꣢ति सो꣣म्यं꣡ मधु꣢꣯ । प्र꣡ राधा꣢꣯ꣳसि चोदयते महित्व꣣ना꣢ ॥१५०९॥

आ꣢ । इ꣡न्दु꣢꣯म् । इ꣡न्द्रा꣢꣯य । सि꣣ञ्चत । पि꣡बा꣢꣯ति । सो꣣म्य꣢म् । म꣡धु꣢꣯ । प्र । रा꣡धा꣢꣯ꣳसि । चो꣣दयते । महित्वना꣢ ॥१५०९॥

Mantra without Swara
एन्दुमिन्द्राय सिञ्चत पिबाति सोम्यं मधु । प्र राधाꣳसि चोदयते महित्वना ॥

आ । इन्दुम् । इन्द्राय । सिञ्चत । पिबाति । सोम्यम् । मधु । प्र । राधाꣳसि । चोदयते । महित्वना ॥१५०९॥

Samveda - Mantra Number : 1509
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 7; Ardh Prapathak » 1;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 14; Khand » 2;

Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar) - हिन्दी
Meaning
प्रस्तुत मन्त्र का अर्थ ३८६ संख्या पर इस प्रकार है (इन्दुम्) = सोम को (इन्द्राय) = उस परमैश्वर्यशाली प्रभु की प्राप्ति के लिए (आसिञ्चत) = अपने अन्दर सींचो। ‘सोमपान करने से प्रभु प्राप्त होते हैं ' यह सोचकर मन्त्र का ऋषि ‘विश्वमनाः' (सोम्यं मधु) = सोम-सम्बन्धी मधु का (पिबाति) = पान करता है। पिया हुआ यह सोम (महित्वना) = महिमा की प्राप्ति के द्वारा (राधांसि) = सफलताओं को (प्रचोदयते) = प्रकर्षेण प्रेरित करता है ।
Essence
सोमपान द्वारा हम प्रभु को प्राप्त करनेवाले हों और संसार में सब कार्यों में सफलता का सम्पादन करनेवाले बनें। 'इहलोक में सफल हों, परलोक में प्रभुदर्शन हो', इस बुद्धि से 'सोम्य मधु' को पीएँ ।
Subject
इहलोक व परलोक साधन