Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

Samveda Mantra 1476

1875 Mantra
Devata- अग्निः Rishi- भरद्वाजो बार्हस्पत्यः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
वे꣢त्था꣣ हि꣡ वे꣢धो꣣ अ꣡ध्व꣢नः प꣣थ꣡श्च꣢ दे꣣वा꣡ञ्ज꣢सा । अ꣡ग्ने꣢ य꣣ज्ञे꣡षु꣢ सुक्रतो ॥१४७६॥

वे꣡त्थ꣢꣯ । हि । वे꣣धः । अ꣡ध्व꣢꣯नः । प꣣थः꣢ । च꣣ । देव । अ꣡ञ्ज꣢꣯सा । अ꣡ग्ने꣢꣯ । य꣣ज्ञे꣡षु꣢ । सु꣣क्रतो । सु । क्रतो ॥१४७६॥

Mantra without Swara
वेत्था हि वेधो अध्वनः पथश्च देवाञ्जसा । अग्ने यज्ञेषु सुक्रतो ॥

वेत्थ । हि । वेधः । अध्वनः । पथः । च । देव । अञ्जसा । अग्ने । यज्ञेषु । सुक्रतो । सु । क्रतो ॥१४७६॥

Samveda - Mantra Number : 1476
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 6; Ardh Prapathak » 3;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 13; Khand » 5;

Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar) - हिन्दी
Meaning
प्रभु' मधुच्छन्दाः ' से ही कह रहे हैं कि १. हे (वेध:) = खूब ज्ञान प्राप्त [well learned] करनेवाला तू (अध्वन:) = [journey] जीवन-यात्रा को (हि) = निश्चय से (वेत्थ) = समझता है, क्योंकि तू (अध्वनः) = वेद के पाठों को ['सहस्राध्वा सामवेदः' में अध्वा = शाखा] वेद की सब शाखाओं को (वेत्थ हि) = अच्छी प्रकार जानता है। वेद को समझने से तू जीवन यात्रा को भी समझता है । (च) = और २. हे (देव) = [विजिगीषा] जीवन-यात्रा में विजय की कामनावाले ! तू (पथः) = रास्तों को – जिनपर तुझे चलना है, उनको (अञ्जसा) = अच्छी प्रकार (वेत्थ) = जानता है 'मुझे किस मार्ग पर चलना है' इसका तुझे ठीक ज्ञान है ३. (अने) = हे आगे और आगे चलनेवाले जीव ! (सुक्रतो) = उत्तम सङ्कल्पों को धारण करनेवाले ! तू यज्ञेषु यज्ञों में अपना जीवन बिता । तेरा जीवन-यज्ञमय हो । इसी प्रकार तेरा जीवन सफल होगा और तू यात्रा को पूर्ण करके अपने घर में वापस लौट सकेगा । 
Essence
हम ज्ञान प्राप्त करें, जीवन के मार्ग को जानें और यज्ञमय जीवन बिताएँ । 
Subject
ज्ञानमार्ग पर आक्रमण, यज्ञमय जीवन