Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

Samveda Mantra 1467

1875 Mantra
Devata- मित्रावरुणौ Rishi- यजत आत्रेयः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
वृ꣣ष्टि꣡द्या꣢वा री꣣꣬त्या꣢꣯पे꣣ष꣢꣫स्पती꣣ दा꣡नु꣢मत्याः । बृ꣣ह꣢न्तं꣣ ग꣡र्त꣢माशाते ॥१४६७॥

वृ꣣ष्टि꣡द्या꣢वा । वृ꣣ष्टि꣢ । द्या꣣वा । रीत्या꣢꣯पा । री꣣ति꣢ । आ꣣पा । इ꣢षः । प꣢꣯तीइ꣡ति꣢ । दा꣡नु꣢꣯मत्याः । बृ꣣ह꣡न्त꣢म् । ग꣡र्त꣢꣯म् । आ꣣शातेइ꣡ति꣢ ॥१४६७॥

Mantra without Swara
वृष्टिद्यावा रीत्यापेषस्पती दानुमत्याः । बृहन्तं गर्तमाशाते ॥

वृष्टिद्यावा । वृष्टि । द्यावा । रीत्यापा । रीति । आपा । इषः । पतीइति । दानुमत्याः । बृहन्तम् । गर्तम् । आशातेइति ॥१४६७॥

Samveda - Mantra Number : 1467
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 6; Ardh Prapathak » 3;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 13; Khand » 4;

Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar) - हिन्दी
Meaning
ये प्राणापान साधना करनेवाले के समाधि की स्थिति में पहुँचने पर – धर्ममेघ समाधि में (वृष्टिद्यावा) = मस्तिष्करूप द्युलोक से आनन्द-कणिकाओं की वृष्टि करानेवाले होते हैं । (रीत्यापा) = ये प्राणापान रेतरूप जलों की ऊर्ध्वगति के [री= गतौ] कारण बनते हैं । इस प्रकार एक उच्चक्षेत्र में विचरने से मनुष्य का मन धन के प्रति उतनी आसक्तिवाला नहीं होता और इस साधक के प्राणापान (दानुमत्याः) = सदा दान के देनेवाली (इष:) = इच्छा के (पती) = स्वामी होते हैं, अर्थात् इसकी वृत्ति दानप्रवण बनी रहती है। अन्त में ये प्राणापान इस साधक को धनासक्ति से ऊपर उठाकर (बृहन्तं गर्तम्) = उस परमपुरुष को (आशाते) = प्राप्त कराते हैं। [पुरुषो गर्त: श० ५.४.१.१५] । नि० ३.४ में ‘गर्त' गृह का नाम है। प्राणापान इस पुरुष को महान् घर को प्राप्त कराते हैं – यह महान् घर भी 'प्रभु' ही हैं । जीव का वास्तविक घर तो प्रभु हैं – यहाँ तो यह यात्रा पर आया हुआ है । प्राणापान की साधना से यह भटकता नहीं और यात्रा को ठीक समाप्त कर काम, क्रोध, लोभ में न फँसकर [आत्रेय] प्रभु से फिर जा मिलता है [यजतः] । एवं प्रभु से मेल करनेवाला यह सचमुच 'यजत' होता है ।
Essence
हम प्राणापान की साधना से १. धर्ममेघ समाधि के आनन्द का अनुभव करें, २. ऊर्ध्वरेतस् बनें, ३. धनासक्ति से ऊपर उठें और ४. प्रभु से जा मिलें।
 
Subject
प्रभु से जा मिलें