Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

Samveda Mantra 1464

1875 Mantra
Devata- अग्निः Rishi- शतं वैखानसाः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
अ꣢ग्न꣣ आ꣡यू꣢ꣳषि पवस꣣ आ꣢ सु꣣वो꣢र्ज꣣मि꣡षं꣢ च नः । आ꣣रे꣡ बा꣢धस्व दु꣣च्छु꣡ना꣢म् ॥१४६४॥

अ꣡ग्ने꣢꣯ । आ꣡यू꣢꣯ꣳषि । प꣣वसे । आ꣢ । सु꣣व । ऊ꣡र्ज꣢꣯म् । इ꣡ष꣢꣯म् । च꣣ । नः । आरे꣢ । बा꣣धस्व । दुच्छुना꣡म्꣢ ॥१४६४॥

Mantra without Swara
अग्न आयूꣳषि पवस आ सुवोर्जमिषं च नः । आरे बाधस्व दुच्छुनाम् ॥

अग्ने । आयूꣳषि । पवसे । आ । सुव । ऊर्जम् । इषम् । च । नः । आरे । बाधस्व । दुच्छुनाम् ॥१४६४॥

Samveda - Mantra Number : 1464
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 6; Ardh Prapathak » 3;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 13; Khand » 4;

Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar) - हिन्दी
Meaning
संख्या ६२७ पर इस मन्त्र का अर्थ इस प्रकार है- (अग्ने) = हे बुराइयों को भस्म करनेवाले प्रभो ! (नः) = हमारे (आयूँषि) = जीवनों को (पवसे) = पवित्र कीजिए। आप (नः) = हमें (ऊर्जम्) = बल और प्राणशक्ति को तथा (इषम्) = प्रेरणा को-प्रकृष्टगति को (आसुव) = प्राप्त कराइए । आप (दुच्छुनाम्) = बुरी प्रवृत्ति को (आरे) = हमसे दूर (बाधस्व) पीड़ित कीजिए- रोक दीजिए । 
Essence
पवमान प्रभु के ध्यान से पवित्रता, बल व प्राणशक्ति तथा उत्तम प्रेरणा प्राप्त होती है और सब दुर्वृत्तियाँ दूर होती हैं ।
Subject
प्रभु के ध्यान से