Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

Samveda Mantra 1447

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- असितः काश्यपो देवलो वा Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
अ꣣मित्रहा꣡ विच꣢꣯र्षणिः꣣ प꣡व꣢स्व सोम꣣ शं꣡ गवे꣢꣯ । दे꣣वे꣡भ्यो꣢ अनुकाम꣣कृ꣢त् ॥१४४७॥

अमित्रहा꣢ । अ꣣मित्र । हा꣢ । वि꣡च꣢꣯र्षणिः । वि । च꣣र्षणिः । प꣡व꣢꣯स्व । सो꣣म । श꣢म् । ग꣡वे꣢꣯ । दे꣣वे꣡भ्यः꣢ । अनुक्राम꣣कृ꣢त् । अ꣣नुकाम । कृ꣢त् ॥१४४७॥

Mantra without Swara
अमित्रहा विचर्षणिः पवस्व सोम शं गवे । देवेभ्यो अनुकामकृत् ॥

अमित्रहा । अमित्र । हा । विचर्षणिः । वि । चर्षणिः । पवस्व । सोम । शम् । गवे । देवेभ्यः । अनुक्रामकृत् । अनुकाम । कृत् ॥१४४७॥

Samveda - Mantra Number : 1447
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 6; Ardh Prapathak » 3;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 13; Khand » 2;

Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar) - हिन्दी
Meaning
हे (सोम) = शान्तस्वभाव प्रभो! आप (पवस्व) = हमारे जीवनों को पवित्र कीजिए तथा (गवे) - हमारी इन्द्रियों के लिए (शम्) = शान्ति प्राप्त कराइए । 

आप (अमित्र-हा) = शत्रुओं के नष्ट करनेवाले हैं । काम, क्रोधादि शत्रुओं को नष्ट करके आप हमारे जीवनों को पवित्र करते हैं । 
(विचर्षणिः)=[पश्यतिकर्मा – नि० ३.११] आप विशेषरूप से हमारा ध्यान करते हैं [Look after] [विविधविद्याप्रदः – द० य० १९.४२] आप सब ज्ञानों के देनेवाले हैं । ज्ञान प्राप्त कराकर

आप काम-क्रोधादि शत्रुओं का नाश करते हैं । इन शत्रुओं के नाश से हमारी इन्द्रियाँ शान्त होती हैं । (देवेभ्यः) = जिन व्यक्तियों के कामादि शत्रुओं का नाश हो गया है और जिनको विद्या का प्रकाश प्राप्त हुआ है, उन देवों के लिए हे प्रभो! आप (अनुकामकृत्) = अनुकूल इच्छाओं को पूर्ण करनेवाले हो। इन देवों में शास्त्रविरुद्ध इच्छाएँ उत्पन्न ही नहीं होतीं । उनकी शास्त्रानुकूल सब इच्छाएँ प्रभु कृपा से अवश्य पूर्ण होती हैं ।
Essence
हम कामादि शत्रुओं का नाश करके तथा विद्या का प्रकाश प्राप्त करके देव बनें । प्रभु हमारी शास्त्रानुकूल सब इच्छाओं को पूर्ण करेंगे ।
Subject
प्रभु द्वारा देवों की इच्छापूर्ति