Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

Samveda Mantra 1440

1875 Mantra
Devata- इन्द्रः Rishi- भरद्वाजो बार्हस्पत्यः Chhand- अनुष्टुप् Swara- गान्धारः
Mantra with Swara
प्र꣡त्य꣢स्मै꣣ पि꣡पी꣢षते꣣ वि꣡श्वा꣢नि वि꣣दु꣡षे꣢ भर । अ꣣रङ्गमा꣢य꣣ ज꣢ग्म꣣ये꣡ऽप꣢श्चादध्वने꣣ न꣡रः꣢ ॥१४४०॥

प्र꣡ति꣢꣯ । अ꣣स्मै । पि꣡पी꣢꣯षते । वि꣡श्वा꣢꣯नि । वि꣣दु꣡षे꣢ । भ꣣र । अरङ्गमा꣡य꣢ । अ꣣रम् । ग꣡मा꣢य । ज꣡ग्म꣢꣯ये । अ꣡प꣢꣯श्चादध्वने । अ꣡प꣢꣯श्चा । द꣣ध्वने । न꣡रः꣢꣯ ॥१४४०॥

Mantra without Swara
प्रत्यस्मै पिपीषते विश्वानि विदुषे भर । अरङ्गमाय जग्मयेऽपश्चादध्वने नरः ॥

प्रति । अस्मै । पिपीषते । विश्वानि । विदुषे । भर । अरङ्गमाय । अरम् । गमाय । जग्मये । अपश्चादध्वने । अपश्चा । दध्वने । नरः ॥१४४०॥

Samveda - Mantra Number : 1440
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 6; Ardh Prapathak » 3;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 13; Khand » 1;

Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar) - हिन्दी
Meaning
३५२ संख्या पर इस मन्त्र का अर्थ इस प्रकार है - 

(प्रति-अस्मै) = प्रत्येक ऐसे व्यक्ति के लिए (नरः) = आगे ले-चलने की भावनाओं को (भर) = परिपूर्ण कीजिए। किसके लिए ?

१. (पिपीषते) = जो रयि और प्राणशक्ति की वृद्धि के लिए सोमपान करना चाहता है, २. (विश्वानि) = न चाहते हुए भी अन्दर प्रवेश करनेवाले काम-क्रोधादि को विदुषे-समझनेवाले के लिए, ३. (अरंगमाय) = [अरं-वारण] – लोकदुःख निवारण के लिए, गतिशील के लिए, ४. (जग्मये) = निरन्तर क्रियाशील के लिए ५. (अपश्चादध्वने) = जीवन में पीछे कदम न रखनेवाले के लिए ।
Essence
हम १. सोमपान की प्रबल कामनावाले बनें । २. काम-क्रोधादि को आत्मालोचन द्वारा समझें। ३. लोकदुःख निवारण के लिए प्रयत्नशील हों । ४. निरन्तर क्रियाशील बनें । ५. जीवन में कभी पीछे पग न रक्खें ।
Subject
हम आगे बढ़ने की भावना से परिपूर्ण हों