Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

Samveda Mantra 1427

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- कुत्स आङ्गिरसः Chhand- त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
अ꣣भि꣡ वस्त्रा꣢꣯ सुवस꣣ना꣡न्य꣢र्षा꣣भि꣢ धे꣣नूः꣢ सु꣣दु꣡घाः꣢ पू꣣य꣡मा꣢नः । अ꣣भि꣢ च꣣न्द्रा꣡ भर्त꣢꣯वे नो꣣ हि꣡र꣢ण्या꣣भ्य꣡श्वा꣢न्र꣣थि꣡नो꣢ देव सोम ॥१४२७॥

अभि꣢ । व꣡स्त्रा꣢꣯ । सु꣣वसना꣡नि꣢ । सु꣣ । वसना꣡नि꣢ । अ꣣र्ष । अभि꣢ । धे꣣नूः꣢ । सु꣣दु꣡घाः꣢ । सु꣣ । दु꣡घाः꣢꣯ । पू꣣य꣡मा꣢नः । अ꣡भि꣢ । च꣣न्द्रा꣢ । भ꣡र्त꣢꣯वे । नः꣣ । हि꣡र꣢꣯ण्या । अ꣣भि꣢ । अ꣡श्वा꣢꣯न् । र꣣थि꣡नः꣢ । दे꣣व । सोम ॥१४२७॥

Mantra without Swara
अभि वस्त्रा सुवसनान्यर्षाभि धेनूः सुदुघाः पूयमानः । अभि चन्द्रा भर्तवे नो हिरण्याभ्यश्वान्रथिनो देव सोम ॥

अभि । वस्त्रा । सुवसनानि । सु । वसनानि । अर्ष । अभि । धेनूः । सुदुघाः । सु । दुघाः । पूयमानः । अभि । चन्द्रा । भर्तवे । नः । हिरण्या । अभि । अश्वान् । रथिनः । देव । सोम ॥१४२७॥

Samveda - Mantra Number : 1427
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 6; Ardh Prapathak » 2;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 12; Khand » 6;

Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar) - हिन्दी
Meaning
कुत्स प्रभु से प्रार्थना करता है कि हे देव- दिव्य गुणों के पुञ्ज (सोम) = अत्यन्त सौम्य – शान्त प्रभो ! (पूयमानः) = हमारे जीवनों को पवित्र करने के हेतु से आप हमें १. (सुवसनानि वस्त्रा) = उत्तम आच्छादन करनेवाले वस्त्रों को (अभि अर्ष) = प्राप्त कराइए । हमें सर्दी-गर्मी से सुरक्षित करने के लिए उत्तम वस्त्र प्राप्त कराइए । २. (सुदुधाः धेनू: अभि अर्ष) = सुख से दोहनयोग्य दुधारू गौवों को प्राप्त कराइए, जिससे शरीर के पोषण में किसी प्रकार की कमी न आये । ३. (नः) = हमारे (भर्तवे) = भरणपोषण के लिए (चन्द्रा हिरण्या) = सोने-चाँदी को अथवा [चदि आह्लादे] आह्लादक धनों को (अभ्यर्ष)=प्राप्त कराइए । सांसारिक आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए आवश्यक धन हमें दीजिए । ४. तथा हमें (रथिनः अश्वान् अभि अर्ष) = रथों में जोते जानेवाले घोड़ों को भी प्राप्त कराइए । सांसारिक जीवन के उत्कर्ष के लिए इनकी आवश्यकता है ही।

एवं वस्त्रों, गौवों, धन तथा घोड़ों के लिए प्रार्थना करता हुआ कुत्स यह समझता है कि [क] मेरी सारी शक्ति इन्हीं की प्राप्ति में समाप्त न हो जाए [ख] इनका अभाव मुझ अपवित्र साधनों के अवलम्बन के लिए बाध्य न करे और इस प्रकार 'अभ्युदय' की सीढ़ी पर चढ़कर मैं 'निःश्रेयस' की साधना करनेवाला बनूँ । [ग] इनके अभाव में कहीं मैं इनके लिए ही लालायित न बना रहूँ । इनको प्राप्त कर मैं इनकी निःसारता का अनुभव ले ज्ञानपूर्वक वैराग्य को प्राप्त करूँ । 
Essence
हे प्रभो ! मुझे अभ्युदय से वञ्चित न कीजिए, जिससे मैं 'निःश्रेयस' साधना के लिए पर्याप्त समय दे सकूँ ।
Subject
कुत्स की आभ्युदयिक प्रार्थना [Necessities ]