Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

Samveda Mantra 1393

1875 Mantra
Devata- इन्द्रः Rishi- मेधातिथि0मेध्यातिथी काण्वौ Chhand- बृहती Swara- मध्यमः
Mantra with Swara
पि꣢बा꣣ त्व꣢३꣱स्य꣡ गि꣢र्वणः सु꣣त꣡स्य꣢ पूर्व꣣पा꣡ इ꣢व । प꣡रि꣢ष्कृतस्य र꣣सि꣡न꣢ इ꣣य꣡मा꣢सु꣣ति꣢꣫श्चारु꣣र्म꣡दा꣢य पत्यते ॥१३९३॥

पि꣡ब꣢꣯ । तु । अ꣣स्य꣢ । गि꣣र्वणः । गिः । वनः । सु꣣त꣡स्य꣢ । पू꣣र्वपाः꣢ । पू꣣र्व । पाः꣢ । इ꣣व । प꣡रि꣢꣯ष्कृतस्य । प꣡रि꣢꣯ । कृ꣣तस्य । रसि꣡नः꣢ । इ꣣य꣢म् । आ꣣सुतिः꣢ । आ꣣ । सुतिः꣢ । चा꣡रुः꣢꣯ । म꣡दा꣢꣯य । प꣣त्यते ॥१३९३॥

Mantra without Swara
पिबा त्व३स्य गिर्वणः सुतस्य पूर्वपा इव । परिष्कृतस्य रसिन इयमासुतिश्चारुर्मदाय पत्यते ॥

पिब । तु । अस्य । गिर्वणः । गिः । वनः । सुतस्य । पूर्वपाः । पूर्व । पाः । इव । परिष्कृतस्य । परि । कृतस्य । रसिनः । इयम् । आसुतिः । आ । सुतिः । चारुः । मदाय । पत्यते ॥१३९३॥

Samveda - Mantra Number : 1393
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 6; Ardh Prapathak » 2;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 12; Khand » 2;

Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar) - हिन्दी
Meaning
हे जीव ! तू (गिर्वणः) = वेदवाणियों का सेवन करनेवाला है— उन वाणियों के द्वारा प्रभु का उपासक है [वन्=संभक्ति], (पूर्वपाः इव) = सबसे प्रथम पान करनेवाले की भाँति (अस्य सुतस्य) = इस शरीर में उत्पन्न हुए-हुए सोम का (पिब तु) = पान कर ही । इसे तू अवश्य अपने शरीर में सुरक्षित करनेवाला बन। यह सोम १. (परिष्कृतस्य) = शरीर में बड़ी विशिष्ट व्यवस्था से तैयार किया जाकर शरीर को स्वास्थ्यादि गुणों से अलंकृत करनेवाला है । २. (रसिनः) = यह जीवन में एक अनिर्वचनीय रस उत्पन्न करता है और अन्त में उस 'रस' स्वरूप प्रभु को प्राप्त करानेवाला है।

प्रभु जीव से कहते हैं कि (इयम् आसुति:) = इस सोम [वीर्य] की उत्पत्ति (चारुः) = अत्यन्त सुन्दर है, अर्थात् यह मेरी सुन्दरतम कृति है । यह (मदाय) = जीवन में विशिष्ट उल्लास के लिए (पत्यते) = समर्थ होती है। इससे ही जीवन का सारा माधुर्य प्राप्त होता है। इसी से इसका नाम ही 'मधु' हो गया है।
Essence
सोमरक्षा का सर्वोत्तम साधन ज्ञानप्राप्ति में लगे रहना और प्रभु का उपासक बनना है। सोमरक्षा को हम प्रमुखता देंगे तो हमारा जीवन परिष्कृत, चारु व मद-उल्लासवाला होगा।
Subject
प्रभु की सुन्दरतम कृति