Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

Samveda Mantra 1340

1875 Mantra
Devata- इन्द्रः Rishi- त्रिशोकः काण्वः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
अ꣡यु꣢द्ध꣣ इ꣢द्यु꣣धा꣢꣫ वृत꣣ꣳ शू꣢र꣣ आ꣡ज꣢ति꣣ स꣡त्व꣢भिः । ये꣢षा꣣मि꣢न्द्रो꣣ यु꣢वा꣣ स꣡खा꣢ ॥१३४०॥

अ꣡यु꣢꣯द्ध । अ । यु꣣द्ध । इ꣢त् । यु꣣धा꣢ । वृ꣡त꣢꣯म् । शू꣡रः꣢꣯ । आ । अ꣣जति । स꣡त्व꣢꣯भिः । ये꣡षा꣢꣯म् । इ꣡न्द्रः꣢꣯ । यु꣡वा꣢꣯ । स꣡खा꣢꣯ । स । खा꣣ ॥१३४०॥

Mantra without Swara
अयुद्ध इद्युधा वृतꣳ शूर आजति सत्वभिः । येषामिन्द्रो युवा सखा ॥

अयुद्ध । अ । युद्ध । इत् । युधा । वृतम् । शूरः । आ । अजति । सत्वभिः । येषाम् । इन्द्रः । युवा । सखा । स । खा ॥१३४०॥

Samveda - Mantra Number : 1340
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 5; Ardh Prapathak » 2;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 10; Khand » 12;

Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar) - हिन्दी
Meaning
(येषाम्) = जिनका (युवा) = बुराई से पृथक् करनेवाला व भलाई से जोड़नेवाला (इन्द्रः) = सब शत्रुओं का विद्रावण करनेवाला प्रभु (सखा) = मित्र होता है, वह (अयुद्धः इत्) = [अविद्यमानं युद्धं यस्य] बिना ही किसी बड़े युद्ध के (युधा) = काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद, मत्सर आदि आसुर सैनिकों से (वृतम्) = घिरे हुए मन को (शूरः) = शूरवीर होता हुआ - शत्रुओं को शीर्ण करनेवाला बनकर (सत्वभिः) = सात्त्विक बलों से (आजति) = उखाड़ फेंकता है। प्रभु की शक्ति से यह इतना शक्तिमान् बन जाता है कि कामक्रोधादि प्रचण्ड शत्रुओं को बिना युद्ध किये उखाड़ फेंकता है। 
Essence
प्रभु की मित्रता में भयंकर आसुरवृत्तियों को जीतना सुगम हो जाता है।
Subject
विना ही युद्ध के विजय