Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

Samveda Mantra 1312

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- शतं वैखानसाः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
प꣡व꣢मान꣣꣬ व्य꣢꣯श्नुहि र꣣श्मि꣡भि꣢र्वाज꣣सा꣡त꣢मः । द꣡ध꣢त्स्तो꣣त्रे꣢ सु꣣वी꣡र्य꣢म् ॥१३१२

प꣡व꣢꣯मान । वि । अ꣣श्नुहि । रश्मि꣡भिः꣢ । वा꣣जसा꣡त꣢मः । वा꣣ज । सा꣡त꣢꣯मः । द꣡ध꣢꣯त् । स्तो꣣त्रे꣢ । सु꣣वी꣡र्य꣢म् । सु꣣ । वी꣢र्य꣢꣯म् ॥१३१२॥

Mantra without Swara
पवमान व्यश्नुहि रश्मिभिर्वाजसातमः । दधत्स्तोत्रे सुवीर्यम् ॥१३१२

पवमान । वि । अश्नुहि । रश्मिभिः । वाजसातमः । वाज । सातमः । दधत् । स्तोत्रे । सुवीर्यम् । सु । वीर्यम् ॥१३१२॥

Samveda - Mantra Number : 1312
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 5; Ardh Prapathak » 2;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 10; Khand » 9;

Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar) - हिन्दी
Meaning
हे (पवमान) = पवित्र करनेवाले प्रभो ! १. (व्यश्नुहि) = आप हममें व्याप्त हों, अर्थात् आपका हममें सदा वास हो । २. आप (रश्मिभिः) =[रश्मि=लगाम] लगामों से (वाजसातमः) = अत्युत्कृष्ट शक्ति प्राप्त करानेवाले हैं, अर्थात् जब स्तोता मनरूप लगाम से इन्द्रियों की वृत्तियों का निरोध करता है, तब प्रभु उसे महान् शक्ति प्राप्त कराते हैं । ३. वे प्रभु (स्तोत्रे) = स्तोता के लिए (सुवीर्यम्) = उत्तम शक्ति देते हैं। स्तोता स्वभावतः वासनाओं से बचा रहता है और इसी कारण उत्तम वीर्य का लाभ करता है। 
Essence
हम प्रभु के स्तोता बन सुवीर्य प्राप्त करें तभी हम प्रभु का निवास स्थान बन पाएँगे।
Subject
स्तोता को सुवीर्य की प्राप्ति